केजीएमयू में डॉक्टरों की लापरवाही ने छह साल के मासूम समेत सात मरीजों की आंखों की रोशनी छीन ली। सभी मरीजों का ऑपरेशन यहां के नेत्र विभाग में हुआ था। मामला खुलने के बाद डॉक्टर इस पर पर्दा डालने में जुट गए हैं।
ऑपरेशन के बाद डॉक्टर पहले तो यह कहकर मरीजों को दिलासा देते रहे कि जैसे हड्डी टूटने के बाद जुड़ने में वक्त लगता है, वैसे रोशनी आने में भी समय लगता है। मगर, सात दिन बाद जब उनकी आंख से मवाद आने लगा तो अपनी गर्दन बचाने के लिए मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया।
मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और ओटी में संक्रमण के चलते उनके आंख की रोशनी गई जबकि डॉक्टरों का दावा है कि ओटी में संक्रमण नहीं था। मरीजों के ऑपरेशन बीते सप्ताह बुधवार से शुक्रवार के बीच किए गए।
ऑपरेशन के बाद बस्ती की शकुंतला (60),राजमोहिनी (68) हरदोई, रीता (42) अंबेडकरनगर, गोंडा के रामसरन (50) समेत दो अन्य मरीजों की आंखों की रोशनी खराब हो गई है। नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों ने लापरवाही छुपाने के लिए एक हफ्ते तक इलाज किया। इसके बाद भी रोशनी नहीं आई तो चार मरीजों को चलता कर दिया जबकि तीन का अब भी भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।