सावन मेले में उमड़ रही शिवभक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लखनऊ और बहराइच की ओर जाने वाले भारी वाहनों पर रोक लगा दी है। हालांकि, यह प्रतिबंध श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आया है लेकिन रोजाना इस मार्ग से सफर करने वाले हजारों आम यात्रियों के लिए यह किसी मुसीबत से कम नहीं है। विशेष रूप से बाराबंकी से बहराइच, रामनगर, कैसरगंज और जरवल रोड की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह से ही चौपुला तिराहा, स्टेशन रोड और हाईवे के किनारे सैकड़ों यात्री किसी वाहन की आस में खड़े दिखे लेकिन न बसें चल रही हैं, न प्राइवेट साधन उपलब्ध हैं। प्रशासन ने पूरे रूट पर बैरीकेडिंग कर ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया है। गर्मी और धूप में बेहाल यात्री कड़ी धूप और उमस भरी गर्मी में यात्रियों का धैर्य जवाब दे रहा है। पसीने से तर-बतर लोग न तो आगे जा पा रहे हैं और न ही पीछे लौटने की स्थिति में हैं। कई यात्री सुबह 6 बजे से बस का इंतजार करते दिखे, लेकिन दोपहर तक कोई साधन नहीं आया। केसरगंज की सुषमा ने बताया कि एक घंटे से परेशान है।
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एक यात्री जान मोहम्मद जो कैसरगंज किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, ने बताया, "सुबह से यहां खड़े हैं, बस क्या कोई ऑटो तक नहीं मिल रहा। पैदल जाना भी मुमकिन नहीं। कोई सूचना तक नहीं दी गई कि कब रास्ता खुलेगा। "
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सावन के विशेष आयोजनों को देखते हुए यह ट्रैफिक प्रतिबंध लगाया गया है। सुरक्षा कारणों से यह आवश्यक है, लेकिन वैकल्पिक मार्गों और साधनों के प्रबंध को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का आक्रोश चौपुला, जीआईसी मोड़ और बस अड्डे के पास सुबह से ही लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर ऐसा प्रतिबंध लगाना ही था, तो पहले से प्रचार-प्रसार और वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
क्या बोले यात्री...
जहां एक ओर सावन मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध जरूरी माने जा सकते हैं। वहीं आमयात्रियों की सुविधा भी नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए थी। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन आम जनता के लिए भी एक सुव्यवस्थित और सूचित वैकल्पिक योजना बनाए।