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सिग्नल फेल, एक ही ट्रैक पर आ गईं दो ट्रेंनें, हादसा टला

Wed, 17 Aug 2016 05:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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स्वतंत्रता दिवस की शाम दिलकुशा केबिन पर दो पैसेंजर ट्रेनों के एक ही ट्रैक पर आमने-सामने जाने से हड़कम्प मच गया। 70 किमी प्रतिघंटे की स्पीड से ट्रेन दौड़ा रहे ड्राइवर ने 150 मीटर दूर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन देख इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन रोक ली। जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। सूचना मिलते ही आनन-फानन रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब दो घंटे बाद इस ट्रैक पर संचालन शुरू हो सका।
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वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर (54333) 15 अगस्त की शाम करीब 5:30 बजे बाराबंकी होते हुए राजधानी आ रही थी। वहीं दूसरी ओर चारबाग रेलवे स्टेशन से प्रतापगढ़ पैसेंजर (54294) रवाना हुई। दिलकुशा केबिन पर पहुंचने से पहले प्रतापगढ़ पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया गया जबकि, वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दिलकुशा केबिन पर प्रतापगढ़ पैसेंजर नार्थ लाइन पर खड़ी थी और वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर भी नार्थ लाइन से ही आ रही थी, जबकि इसे केबिन से साउथ लाइन पर टर्न होकर चारबाग के लिए जाना था।
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लेकिन केबिन पर प्वाइंट फेल होने से ड्राइवर ट्रेन को नार्थ लाइन पर ही बढ़ाता रहा, जिससे केबिन के आगे सपा कार्यालय के पास बनी क्रॉसिंग तक पहुंच गई। इसके बाद बने प्वाइंट नम्बर 305 पर ड्राइवर ने जब सामने प्रतापगढ़ पैसेंजर ट्रेन खड़ी देखी तो आनन-फानन में ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी‌ मिलते ही पहुंचे आला अधिकारी

दो पैसेंजर ट्रेनों के एक ही लाइन पर आने की सूचना कंट्रोल रूम को दी गयी। जिसके बाद चारबाग रेलवे स्टेशन का स्टाफ, जीआरपी कर्मी और डीआरएम कार्यालय से आला अधिकारी मौके पर पहुंचे।

निरीक्षण के बाद प्वाइंट नम्बर 305 पर रुकी वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को नार्थ लाइन पर ही पीछे की लाया गया और प्रतापगढ़ पैसेंजर को आगे बढ़ाकर रवाना किया गया।

इसके बाद वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर को कॉशन देकर चारबाग तक लाया गया। इसके चलते करीब ढाई घंटे तक इस रेलखण्ड पर ट्रेनों का संचालन बाधित रहा।

70 से घटाकर 15 किमी. कर दी स्पीड
वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन जब दिलकुशा केबिन पहुंची तो ड्राइवर ने स्पीड कम कर दी। 70 किमी. प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही ट्रेन को कॉशन देकर केबिन से निकाला जा रहा था। इस दौरान ट्रेन की स्पीड 10 से 15 किमी. प्रति घंटे थी। जिससे हादसे की आशंका काम हो गई।

दर्जनभर ट्रेनें हुईं प्रभावित

- फोटो : amar ujala
दिलकुशा केबिन पर ट्रेनों के आमने-सामने आने से इस रूट से गुजरने वाली करीब दर्जनभर ट्रेनों पर इसका असर पड़ा।

फरक्का एक्सप्रेस, अमरनाथ, श्रमजीवी, काशी विश्वनाथ, बिहार सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस के साथ ही कानपुर पैसेंजर, कानपुर सेंट्रल बाराबंकी मेमू, वाराणसी जम्मू तवी सुपरफास्ट भी लेट हुई।

सिग्नल के दो कर्मचारी सस्पेंड
घटना की शुरूआती जांच में सिग्नल एंड टेलीकम्यूनिकेशन (एसएंडटी) डिपार्टमेंट को इसके लिए जिम्मेदार माना गया है। जिसके बाद दो कर्मचारियों सिग्नल इंजीनियर तिलकराम और सिग्नल मेंटेनर आशीष पांडे को सस्पेंड कर दिया गया है। डीआरएम एके लाहोटी के निर्देश पर संरक्षा (सेफ्टी) विभाग को मामले की जांच सौंपी गई है।
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150 मीटर पर ट्रेन देख लगाया इमरजेंसी ब्रेक

- फोटो : amar ujala
वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर का ड्राइवर ट्रेन को नार्थ लाइन पर आगे बढ़ाता जा रहा था। दिलकुशा केबिन में दो प्वाइंट पार करने के बाद जब ट्रेन सपा कार्यालय के पास बनी रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंची तो ड्राइवर ने करीब 150 मीटर की दूरी पर प्रतापगढ़ पैसेंजर खड़ी देखी। एक्सीडेंट की आशंका से ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक ली, जिससे हादसा टल गया।

ट्रेन रुकते ही कूद गए यात्री
महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर जब वाराणसी-लखनऊ ट्रेन के ड्राइवर ने ब्रेक लगाए तो दोनों ट्रेनों में बैठे यात्री घबराकर ट्रैक पर उतर आए। वहीं दूसरी ओर सूचना मिलने पर रेलवे महकमे में भी हड़कम्प मच गया। मैकेनिकल, इंजीनियरिंग, सेफ्टी और सिग्नल कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति संभाली।
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