हालांकि विमान को रोक दिया गया और यात्रियों को दूसरे विमान से रवाना किया गया। सुरक्षाकर्मियों ने सुनील से कड़ाई से पूछताछ की। उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, लेकिन विमान से दोबारा यात्रा नहीं करने दी गई। विमान की गहन जांच-पड़ताल के लिए इंजीनियरों की टीम बुलाई गई।
विमान की इमरजेंसी विंडो डैनों पर खुलती है। इससे आपात स्थिति में पैसेंजरों को स्लाइडर की मदद से डैनों के मार्फत नीचे उतारा जाता है। ‘नीरजा’ फिल्म में इसे दिखाया गया है। इमरजेंसी विंडो सीट के लिए अतिरिक्त शुल्क लगता है। दरअसल, इस सीट पर पैर फैलाने व सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह होती है, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को राहत हो जाती है।
अगर, इमरजेंसी विंडो को अचानक बीच हवा में खोल दिया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। विशेषज्ञों कहते हैं कि 30 हजार फीट की ऊंचाई के आसपास जब विमान उड़ान भर रहा हो और विंडो खोल दी जाए तो केबिन प्रेशर तेजी से घटने लगता है, जिससे एक ओर विमान का संतुलन गड़बड़ा जाता है तो दूसरी ओर ऑक्सीजन का स्तर घटने लगता है, जिससे यात्रियों को हाइपोक्सिया हो जाती है।
हालांकि, ऑक्सीजन मास्क विमान में रहते हैं। इतना ही नहीं, गर इसे ठंडे इलाकों में बीच हवा में झटके से खोल दिया जाए तो अंदर का तापमान जमा देने जैसा भी हो सकता है।