लखनऊ आए शिवसेना नेता संजय राउत पर कुछ युवकों ने स्याही फेंक दी। बताया जा रहा है कि आरोपी युवक पार्टी कार्यकर्ता हैं। इस घटना के बाद इन युवकों की जमकर धुनाई हुई। पिटाई से एक की हालत गंभीर है उसका ट्रामा में इलाज चल रहा है।
मंगलवार को संजय लखनऊ में मौजूद थे। वह एयरपोर्ट से हजरतगंज के वीआईपी गेस्ट हाउस की तरफ आ रहे थे। गेट पर पहुंचते ही उन पर किसी ने स्याही फेंक दी। इस बारे में संजय राउत ने कहा कि मैं पता करने की कोशिश कर रहा हूं कि क्या हुआ था। हमें देखना पड़ेगा कि स्याही फेंकने वाला कौन था।
सूत्रों के मुताबिक शिवसेना का यूपी में कोई ऑफिशियल राज्य प्रमुख नहीं है। वहीं शिवसेना के कोऑर्डिनेटर दिनेश शुक्ला अपने साथ अनिल सिंह को लेकर चलते हैं और उन्हें राज्य प्रमुख बताते हैं। इन्हीं सब बातों को लेकर शिवसैनिकों का एक कोऑर्डिनेटर ग्रुप नाराज रहता है। सूत्रों की मानें तो स्याही का टारगेट कोई और था।
वहीं खुद को यूपी का राज्य प्रमुख कहने वाले बीएन शुक्ला के मुताबिक संगठन के लोग अनिल सिंह को तवज्जो मिलने से नाराज हैं। उन्होंने कहा, निष्कासित अनिल सिंह को प्रमुख बना दिया। हमें पता भी नहीं।
उन्होंने कहा, उद्धव ठाकरे के लिए मेरे मन में कोई सम्मान नहीं। वह देखते नहीं कि उनकी पार्टी का प्रवक्ता निकाले गए आदमी के साथ बैठा है। अनिल सिंह को राष्ट्रीय प्रमुख ने निष्कासित किया है। संजय राउत को इस बात का सम्मान करना चाहिए था। अनिल सिंह को अपने साथ नहीं बैठाना चाहिए था।
स्याही फेंकने वाले आपके ही साथी थे, इस पर उन्होंने जवाब दिया कि शिवसेना में मैं 1989 से हूं। जिसने चोरी की है वो भी मेरा साथी है, जिसने स्याही फेंकी वो भी मेरा साथी है, जिसने मार खाई वो भी मेरा साथी है, जिसने मारा वो भी मेरा साथी है।
जब पूछा गया कि स्याही फेंकने वाले आपके गुट के असंतुष्ट साथी थे? इस पर उन्होंने कहा कि असंतुष्ट तो मेरे गुट के लोग थे ही नहीं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने किसी गुट को मान्यता नहीं दी है। जरूरत पड़ी तो हम अलग पार्टी बना लेंगे।