लखनऊ। केजीएमयू में आर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के प्रो. शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, घुटने का आंशिक प्रत्यारोपण कारगर है। अब मरीजों को पूरा घुटना प्रत्यारोपित नहीं कराना होगा। ऐसा होने पर रोगी पहले की तरह सामान्य जीवन जी सकेगा। प्रो. शैलेंद्र सिंह रविवार को आर्थोपेडिक सर्जरी और एनॉटमी विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे।
केजीएमयू के आर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि आंशिक घुटना प्रत्यारोपण उन मरीजों के लिए एक प्रभावी विकल्प है, जिन्हें पूरे घुटने को बदलने की जरूरत नहीं होती। यह सर्जरी मरीजों को तेजी से ठीक होने और सामान्य जीवन जीने में मदद करती है। आंशिक घुटना प्रत्यारोपण का मुख्य लाभ यह है कि इसमें पूरे घुटने को बदलने की आवश्यकता नहीं होती, केवल क्षतिग्रस्त हिस्से को ही बदला जाता है। इससे मरीज के प्राकृतिक घुटने का अधिकांश हिस्सा बरकरार रहता है। यह प्रक्रिया कम आक्रामक होती है, जिसके परिणामस्वरूप दर्द कम होता है और अस्पताल में रहने की अवधि भी घट जाती है। मरीज का जीवन पूरी तरह से पहले की तरह सामान्य रहता है, जिससे उन्हें अपनी दैनिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने में आसानी होती है।
केजीएमयू में सवा लाख रुपये खर्च
डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि आंशिक प्रत्यारोपरण की सर्जरी पर करीब सवा लाख रुपये का खर्च आता है। इस प्रक्रिया में मरीज अगले दिन से ही चलने-फिरने लगता है, जिससे उसकी रिकवरी बहुत तेज होती है। इसके अतिरिक्त, इस सर्जरी में खून का बहाव भी कम होता है, जो इसे पारंपरिक पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण की तुलना में कम जोखिम भरा बनाता है।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।
कार्यक्रम में पहुंचे चिकित्सक व अन्य लोग।