लखनऊ। राजधानी में संचालित निजी अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टरों के बजाय अन्य विधाओं के डॉक्टर इलाज कर रहे हैं। इससे मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है। जांच में कई अस्पतालों में यह अनियमितता पाई जा चुकी है। यहां तक कि कई आईसीयू भी गैर-एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय अधिकारियों ने नोटिस जारी कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
शहर में करीब 1000 निजी अस्पताल हैं, जिनमें से लगभग 600 में आईसीयू संचालित हैं। कागजों पर एमबीबीएस डॉक्टर तैनात दिखाए जाते हैं, जबकि वास्तविक संचालन अन्य डॉक्टर करते हैं। उप्र विधानमंडल की महिला एवं बाल विकास संबंधी बैठक में निजी अस्पतालों की आईसीयू की जांच कराने के निर्देश डीजी हेल्थ को दिए गए थे। डीजी ने सीएमओ से जांच कराकर रिपोर्ट मांगी थी। सीएमओ ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित बनाई थी। इसमें डॉ. एपी सिंह, डॉ. निशांत निर्वाण, डॉ. रवि पांडेय, डॉ. केडी मिश्रा, डॉ. संदीप सिंह शामिल हैं। कमेटी ने छह माह में सिर्फ 16 अस्पतालों का निरीक्षण किया, जिसमें 10 में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिले। वहीं, मेयो हॉस्पिटल, चंदन हॉस्पिटल, मेदांता समेत अन्य बड़े अस्पतालों की आईसीयू की जांच कर रिपोर्ट विधानमंडल कमेटी को भेजी गई थी।
इसलिए नहीं मिलते एमबीबीएस डॉक्टर
अस्पतालों के पंजीकरण के वक्त एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री लगाना अनिवार्य होता है। एमबीबीएस डॉक्टर अस्पताल में सेवा देने के लिए एक लाख रुपये से अधिक मासिक वेतन की मांग करते हैं। जबकि दूसरी विधा के डॉक्टर आसानी से 30-35 हजार रुपये में सेवा देने को राजी हो जाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर ऑन कॉल बुलाए जाते हैं। यह स्थिति जिले की 90 फीसदी अस्पतालों की है। वहीं, एमबीबीएस डॉक्टर डिग्री लगाने के लिए निजी अस्पताल से साल का एक लाख रुपये से अधिक शुल्क लेते हैं।
निरीक्षण में मिले दूसरी विधा के डॉक्टर
नर्सिंग होम के नोडल डॉ. एपी सिंह व लेवल वन के डॉ. संदीप सिंह ने कुछ महीने पहले दुबग्गा इलाके के 10 अस्पतालों में छापा मारा था। इसमें मां वैष्णो व इंप्लस अस्पताल अवैध मिले थे, जबकि जीवन ज्योति, समीर, बॉम्बे, सरकार, निदान, एसआरएस, हर्बल और न्यू लखनऊ सिटी हॉस्पिटल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिले थे। अफसरों ने इन्हें नोटिस थमाया और फिर मामले में सांठगांठ करके दबा गए।
Iकई निजी अस्पतालों की जांच कराई गई थी। वहां कुशल विशेषज्ञ मिले थे। जिन जगह पर विशेषज्ञ नहीं मिले थे, उन्हें नोटिस दिया गया था। संबंधित डॉक्टर को बुलाकर गैरहाजिर मिलने पर जवाब मांगा गया था। अब दोबारा जांच में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिले तो कार्रवाई होगी।I
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- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI