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Parliament Security Breach:एक दशक पहले सागर में आए थे बगावती तेवर, इस तरह हुई ललित से मुलाकात

Sat, 16 Dec 2023 06:53 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ

सार

डायरी के लगभग हर पेज पर सबसे ऊपर इंकलाब जिंदाबाद लिखा है। देशप्रेम समेत तमाम कविताएं व शायरी लिखी हैं। जिसमें से कुछ इस तरह की हैं- दर्द अपने वतन का मुझसे देखा जाता नहीं, दुश्मन के आगे झुकना मैं किसी को सिखाता नहीं..।
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सागर की मां से पुलिस ने की पूछताछ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संसद की सुरक्षा भेदने वाले सागर शर्मा के करीब एक दशक पहले बगावती तेवर पनपने शुरू हुए थे। तब उसकी उम्र महज 17-18 साल रही होगी। इसके दो साल बाद 2015 में उसने डायरी लिखनी शुरू कर दी। जिसमें इंकलाब जिंदाबाद से हर पन्ने की शुरुआत होती थी। फिर वह उसमें बगावती व जुनूनी कविताएं व शायरी लिखता था। वह तानाशाह हिटलर से काफी प्रभावित है। जासूसी कहानियां पढ़ने का शौकीन है। जब वह ललित झा व अन्य साथियों के संपर्क में आया तब उसका बगावतीपन और बढ़ गया। जिसके बाद उसने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।

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डायरी के लगभग हर पेज पर सबसे ऊपर इंकलाब जिंदाबाद लिखा है। देशप्रेम समेत तमाम कविताएं व शायरी लिखी हैं। जिसमें से कुछ इस तरह की हैं- दर्द अपने वतन का मुझसे देखा जाता नहीं, दुश्मन के आगे झुकना मैं किसी को सिखाता नहीं..। हमने हंसकर चुनी है राह देश पर जान लुटाने की, जान जाय तो जाय कोई फिक्र नहीं कुर्बानी की..., जल उठी कतरा कतरा चिंगारी, देश से जुर्म मिटाने की...। इसी तरह दर्जनों शायरी उसने लिखी हैं। वह कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे वह पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींच सके। हुआ भी कुछ ऐसा ही।

सागर ने 2013 में हाईस्कूल व 2015 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। इसी वक्त से उसने डायरी लिखनी शुरू की। बीच में पांच साल तक कुछ नहीं लिखा। फिर 24 जनवरी 2021 को फिर डायरी लिखनी शुरू की। उसने लिखा कि आज लगभग पांच वर्षों बाद मैंने लिखना शुरू किया है। इन पांच सालों का अपना व्यक्तिगत अनुभव इसलिए लिखने की जरूरत महसूस हुई कि अब आगे भी लिखने की मानसिक स्थिति बनेगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं कह सकता। पर सच कहूं तो मैं बेहद इच्छुक भी हूं कि अपनी मानसिकता, दृष्टिकोण और उद्देश्यों को लेखन के जरिए पाठकों से साक्षात्कार करा सकूं..।
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साथ में ये भी लिखा... एक तरफ डर भी है और दूसरी तरफ कुछ भी कर गुजरने की आग दहक रही है। काश अपनी स्थिति माता-पिता को समझा सकता। मगर ऐसा नहीं है कि मेरे लिए संघर्ष की राह चुनना आसान रहा है, हर पल उम्मीद लगाए पांच साल मैंने प्रतीक्षा की है कि एक दिन आए जब मैं अपने कर्तव्य की ओर बढ़ूंगा। घर से विदा लेने का समय नजदीक आ गया है।

जिस तरह से उसने दोबारा डायरी लिखनी शुरू की उससे ऐसा लगता है कि वह उसके पहले ललित व अन्य साथियों के संपर्क में आ चुका था। वह उनसे काफी प्रभावित था। क्योंकि इस बार जो उसने लिखा उसमें बगावती स्वर काफी अधिक हैं। हालांकि डायरी में अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ नफरत है। परिजनों का भी यही कहना है कि सागर हमेशा कहता था कि कोई गरीब नहीं होना चाहिए। कोई किसी को प्रताड़ित न करे। सागर के कमरे से अडोल्फ हिटलर की मेरा संघर्ष, शरलॉक होम्स, जासूसी की रोचक और रोमांचक दुनिया जैसी कई किताबें बरामद हुईं। जांच एजेंसियों ने किताबों को कब्जे में ले लिया है। सागर के पिता रोशनलाल ने बताया कि बंगलूरू के दोस्त के बारे में उनको जानकारी थी। सागर अक्सर उसकी तारीफ करता था। उन्होंने बताया कि जो किताबें हैं वह उसी दोस्त ने सागर को पढ़ने के लिए दी थीं। वह दोस्त कोई और नहीं बल्कि मनोरंजन डी है, जो साथ में संसद के भीतर दाखिल हुआ था।

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