लखनऊ। कोरोना के कारण नगर निगम के 50 से अधिक पार्किंग ठेकों का टेंडर इस बार नहीं उठ पाया। भूमिगत पार्किंग को लेने के लिए भी निजी कंपनियां आगे नहीं आईं। इससे निगम को एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इसको देखते हुए निगम प्रशासन एक बार फिर पार्किंगों को ठेके पर देने की तैयारी में है। इसके तहत चालू वित्तीय वर्ष के बचे से दो महीनों का भी टेंडर उन्हीं ठेकेदारों को दे दिया जाएगा जो अगले वित्तीय वर्ष के लिए ठेके लेने का टेंडर डालेंगे।
नगर निगम में इस बार 50 से अधिक पार्किंग स्थलों का टेंडर कोरोना के चलते नहीं दे पाया। अब इनके टेंडर 14 महीने के लिए उठाने की तैयारी है। अनलॉक शुरू होने के बाद पार्किंगों को उठाने का प्रयास किया गया, लेकिन उठ नहीं पाईं। ठेके मार्च तक के लिए ही उठाए जा रहे थे। ऐसे में तीन चार महीने के लिए ठेेका लेने के लिए ठेेकेदार भी आगे नहीं आए। अब स्थिति सामान्य होने पर निगम प्रशासन फिर से टेंडर निकालने जा रहा है। जिसमें अब वह चालू वित्तीय वर्ष के शेष दो महीने को भी नए वित्तीय वर्ष की अवधि में जोड़ देगा।
भूमिगत पार्किंग में बदलेगी पास की व्यवस्था
खुुली पार्किंगों के अलावा लालबाग की दो और अमीनाबाद की एक भूमिगत पार्किंग को भी ठेके पर देने की तैयारी है। अभी इनका संचालन नगर निगम कर रहा है। इन पार्किंग में मासिक पास पर भी गाड़ी खड़ी करने की सुविधा है। इससे गाड़ी मालिक को कम पैसे देने पड़ते हैं। जानकारों का कहना है कि निजी हाथों में जाने के बाद यह व्यवस्था महंगी हो सकती है।
एलडीए ने नहीं हैंडओवर की पार्किंग
हजरतगंज की मल्टीलेवल पार्किंग सहित हैंडओवर कॉलोनियों की सभी पार्किंग एलडीए से नगर निगम केे दी जानी है। इसके लिए दो महीने पहले एलडीए बोर्ड में प्रस्ताव भी पास हो चुका है, लेकिन एलडीए ने अभी कोई भी पार्किंग नगर निगम को नहीं दी है। नगर आयुक्त अजय द्विवेदी का कहना है कि जो पार्किंग नहीं उठ पाई हैं, उनके टेंडर फिर से जारी किए जाएंगे। इसके लिए इस वित्तीय वर्ष में जो दो महीने बचे हैं उनका समय भी नए वित्तीय वर्ष में जोड़ा जाएगा। ऐसे में 14 महीने के लिए ठेका उठाया जाएगा।