लखनऊ। नगर निगम का सदन त्रिलोकनाथ हॉल में चलता है। यहां पार्षदों और नेता दलों या अन्य नामित या पदेन सदस्यों के बैठने को लेकर तय व्यवस्था नहीं है। जिसका जहां मन करता है, वहां बैठता है। वरिष्ठता का कोई क्रम नहीं है। इसे लेकर विधानसभा की तरह हॉल बनाने का प्रस्ताव तीन साल पहले पास हो चुका है, लेकिन हाल यह है कि अभी तक कुर्सियां भी नहीं बदली गईं।
नगर निगम को शहर की सरकार कहा जाता है। यहां के पार्षद प्रदेश की सत्ता में शीर्ष तक पहुंचे हैं। मौजूदा सरकार में भी यहां से निकले जनप्रतिनिधि उच्च पदों पर हैं, लेकिन नगर निगम सदन की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। यहां बैठने की उचित व्यवस्था हो, आम लोग भी कार्यवाही देख सकें, नेता दलों और पदेन सदस्यों के बैठने की अलग सीट हो। इसे लेकर तीन साल पहले प्रस्ताव पास हुआ था, पर हुआ कुछ नहीं।
दो साल में लग पाए एसी
निगम सदन में एसी लगाने का काम दो साल में हो सका। यहां फॉलसीलिंग भी लगी है। यह काम भी उस प्रस्ताव पर हुआ, जो चार साल पहले पास हुआ था। सदन में कुर्सी, मेज, दीर्घा बनाने और अध्यक्ष के आसान बनाने को लेकर कोई काम नहीं हुआ।
सदन में फिर उठाएंगे मामला
सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू, कांग्रेेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी, कार्यकारिणी सदस्य मो. सलीम, राजकुमार सिंह राजा, अमित चौधरी, नागेंद्र सिंह चौहान, गिरीश मिश्रा ने कहा, नगर निगम सदन के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव पास हो चुका है। अभी तो यह हाल भर है, जहां कुछ व्यवस्थित नहीं है। प्रस्ताव पर अमल हो, इसे लेकर सदन में फिर मामले को उठाया जाएगा और पास हो चुके प्रस्ताव की याद दिलाई जाएगी।