पंकज प्रसून इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनने को उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यह हिंदी कविता की जीत है। वह बताते हैं कि वर्ष 2009 में उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विश्व भाषा हिंदी-दशा व दिशा पर एमफिल की थी तब उन्होंने उसमें कैम्ब्रिज में हिंदी पर लेख लिखा था। उन्होंने कभी सोचा ही नहीं था कि एक दिन वहीं से बुलावा आएगा।
बैसवारे में जन्मे पंकज प्रसून पिछले डेढ़ दशक से लखनऊ में रह रहे हैं। उनकी अब तक सात किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से दो बार सम्मानित किया जा चुका है। वह पेशे से केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ में तकनीकी अधिकारी हैं। पंकज कहते हैं कि वैज्ञानिक तन की और कवि मन की वैक्सीन बनाता है।