लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल की आयुष यूनिट में अब पंचकर्म भी होगा। इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी। जिले के दूसरे अस्पतालों में भी इसकी सुविधा शुरू होगी। अस्पताल प्रशासन ने एनएचएम को पंचकर्म यूनिट शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। बजट मिलने बाद इसकी शुरुआत होगी।
बलरामपुर अस्पताल में आयुष यूनिट का संचालन हो रहा है। अस्पताल में आयुष चिकित्सक भी तैनात हैं। ओपीडी में हर दिन करीब 40-50 मरीज आ रहे हैं। यूनिट को अब विशिष्ट बनाने की तैयारी है। अभी तक पंचकर्म के लिए मरीजों को आयुर्वेद कॉलेज या लोकबंधु अस्पताल जाना पड़ता था। अब एक से डेढ़ महीने में बलरामपुर अस्पताल में भी इसकी सुविधा शुरू होगी।
अस्पताल प्रशासन ने यूनिट शुरू करने के लिए एनएचएम से 10 लाख रुपये बजट की मांग की है। अफसरों का कहना है पंचकर्म यूनिट के लिए बॉयलर, ओवन, स्टीम कैबिनेट, मसाज पंप, सिरोधर टेबल, वमन पीठ, नोज पीठ, इंफ्रा रेड बाथ कैबिनेट की जरूरत होगी। बजट मिलते ही पंचकर्म के लिए सामान का क्रय किया जाएगा।
क्या है पंचकर्म
आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को त्रिदोष कहा गया है। स्वस्थ रहने के लिए इन तीनों दोषों का संतुलित रहना जरूरी है। इनमें से किसी एक दोष के असंतुलित होने से शरीर में विषैले रोगकारक तत्व पनप जाते हैं। यही बीमारी का कारक बनते हैं। ऐसे में पंचकर्म चिकित्सा से शरीर का शोधन कर विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालकर त्रिदोषों को संतुलित किया जाता है।
इन बीमारियों में मिलेगी राहत
बलरामपुर अस्पताल की आयुष यूनिट में तैनात डॉ. अरुण कुमार निरंजन ने बताया कि पंचकर्म में मरीजों का शारीरिक शुद्धीकरण कर रोगों का निदान किया जाता है। इसमें पांच विधि से मरीजों की बीमारियों का इलाज होता है। स्नेहन के जरिये जोड़ों के दर्द, गठिया में राहत मिलती है। श्वेदन में मरीज को स्टीम दी जाती है। शिरोधारा विधि में माइग्रेन, अनिंद्रा, सिर दर्द व उलझन में आराम मिलता है। कटिबस्ति समेत अन्य विधा से मरीजों को अन्य दूसरी बीमारियों में राहत मिलती है।