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लोहिया संस्थान में लगा प्रदेश का पहला बैक्लोफेन पंप, असहनीय दर्द से देगा राहत

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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कैंसर और रीढ़ की गंभीर चोट के दर्द से राहत देने के लिए इलाज की नई सुविधा की शुरुआत की गई है। इसके तहत एक मरीज को बैक्लोफेन पम्प लगाया जाता है। इस पम्प के माध्यम से छह माह तक मरीज के शरीर के भीतर दवा जाती रहती है। इसकी मात्रा पहले से तय होती है। इससे मरीज को दर्द से बड़ी राहत मिल जाती है।
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संस्थान के एनीस्थीसिया एंड पेन क्लीनिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि आंकोलॉजी विभाग में बोन कैंसर का इलाज करा रहे 55 वर्षीय मरीज को एनेस्थीसिया एंड पेन क्लीनिक में दर्द से राहत देने के लिए भेजा गया था। मरीज पर दर्द की दवाएं असर नहीं कर रही थीं। ऐसे में मरीज को नियमित अंतराल पर दवा की खुराक सीधे उसकी हड्डी में देनी होती है। यह काम बैक्लोफेन पंप के माध्यम से किया जाता है। इस पंप में दवा भरी होती है। यह अपने आप निश्चित मात्रा में दवा शरीर में भेजता रहता है। विभाग के डॉ. अनुराग अग्रवाल ने इस मरीज पर इसी पद्धति का प्रयोग करने की योजना बनाई। इसके बाद प्रदेश का पहला बैक्लोफेन पंप इस मरीज को लगाया गया। इसके सकारात्मक परिणाम आए। अब मरीज को दर्द से राहत मिल गई हैं। लोहिया संस्थान में इसकी लागत करीब पांच लाख रुपये है। निजी संस्थानों में इसका खर्च दोगुना आता है। हालांकि, उसका कैंसर का इलाज अभी भी जारी है। मरीज को पंप के माध्यम से दवाएं देने से पहले नियमित रूप से स्पाइन में दवा देकर जांच की गई थी। प्रभावी होने पर ही यह पंप लगाया गया है। यह पद्धति विभिन्न प्रकार के अन्य दर्द में भी उपयोग की जा सकती है।
12 साल से कम आयु पर नहीं लगती मशीन
बैक्लोफेन की स्वीकृति 12 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए स्वीकृत नहीं है। एलर्जी, स्तनपान या गर्भावस्था के दौरान भी इसे सुरक्षित नहीं माना गया है।
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