वे कहते हैं कि ‘हर मनुष्य का खून एक जैसा होता है, मैं मनुष्यों के बीच खून के इस रिश्ते में आस्था रखता हूं। इसी वजह से मैं जब तक जिंदा हूं किसी भी मानव शरीर को कुत्तों के लिए या अस्पताल में सड़ने नहीं दूंगा’।
जैसे ही कोई लावारिस शव मिलने की खबर मिलती है, शरीफ चाचा पोस्टमार्टम हाउस पहुंच जाते हैं और पोस्टमार्टम होने तक यदि उसका कोई वारिस नहीं आता तो वह मृतक के धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्कार करते हैं।