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राजधानी में ऑक्सीजन सिलेंडर तीन गुना महंगा, इसके बाद भी आसानी से नहीं मिल रहा

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लखनऊ। राजधानी में कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार के चलते बनी ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी प्रशासन के लाख दावों के बाद भी दूर नहीं हो पा रही है। इस कमी के चलते 300 रुपये में मिलने वाला सिलेंडर 1000 रुपये में बेचा जा रहा है। निजी अस्पताल और बीमारों के घर वाले यह कीमत भी देने को तैयार हैं, लेकिन इसके बाद भी सिलेंडर बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है।
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कोरोना संक्रमित संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि के कारण मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं। इससे लोग अपने घरों में आइसोलेट होने को मजबूर हैं। घर में लोग दवाएं तो ले रहे हैं, लेकिन ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर उनके पास विकल्प नहीं बच रहा है। कोरोना के नए स्ट्रेन के चलते इस बार लोगों में तेजी से ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है। आलम यह है कि ऑक्सीजन लेवल एक झटके में 80 तक पहुंच जा रहा है। इसके बाद लोग किसी नर्स या निजी अस्पताल से संपर्क कर ऑक्सीजन लगवाना चाहते हैं, लेकिन यह भी उन्हें मुहैया नहीं हो पा रही है। पहले तो ऑक्सीजन सिलेंडर मिलता ही नहीं, यदि मिल भी जाता है तो उसके तीन गुना दाम देने पड़ रहे हैं।
निजी अस्पताल में भी समस्या
सरकारी अस्पताल में पहले से ही टेंडर आदि होने से वहां ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन निजी अस्पतालों का बुरा हाल है। खपत के हिसाब से उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। डालीगंज स्थित निजी अस्पताल के संचालक ने बताया कि उन्हें रोज 20 सिलेंडर की जरूरत पड़ती थी और कभी भी इसकी व्यवस्था में समस्या नहीं हुई। लेकिन इस समय ऑक्सीजन की मांग बढ़ने के साथ ही इसके दाम भी बढ़ गए हैं। कई लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर अपने घरों में लगवाने के लिए भी संपर्क किया।
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