उत्तर प्रदेश में ओवरलोडिंग वाहनों से वसूली का लंबा खेल चला। इस घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को गोरखपुर में पकड़े गए एजेंट ढाबा मालिक धर्मपाल की डायरी हाथ लगी जिसने कई अहम राज खोल दिए। इसी डायरी के जरिए जहां इस घोटाले का सारा हिसाब किताब सामने आया तो कई परिवहन अधिकारियों का इससे संबंध भी पुख्ता हुआ। एसआईटी ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को सौंप दी है जहां इसका अध्ययन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस प्रकरण में कई एआरटीओ और अन्य अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
दरअसल यह मामला वर्ष 2020 का है। यूपी एसटीएफ ने गोरखपुर में करोड़ों रुपये का ओवरलोडिंग घोटाला पकड़ा था। पता चला था कि पूरे प्रदेश में एक रैकेट काम कर रहा है। इसका आधार एजेंट थे। यूपी के ट्रक संचालकों से एजेंट सीधे संपर्क में रहते थे और कमीशन वसूलते थे। ट्रक संचालक मनमर्जी से ट्रक को ओवरलोड कर ले जाते थे। कमीशन न देने पर ट्रक पकड़ा जाता था। यदि कमीशन देने के बावजूद ट्रक ओवरलोडिंग में पकड़ा जाए और उसका चालान हो जाए तो चालान की रकम एजेंट अदा कर देते थे। बेहद संगठित ढंग से यह काला कारोबार अपनी जड़ें जमाए था।
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इसमें गोरखपुर के एक ढाबा मालिक से एसआईटी को डायरी हाथ लगी थी जिससे अहम खुलासे हुए। इस पूरे गैंग के तार परिवहन के अधिकारियों तक मजबूती से जुड़े थे। एजेंट सीधे एआरटीओ के संपर्क में थे और एआरटीओ के चालक व साथ चलने वाले सिपाही इसमें अहम भूमिका अदा करते थे। जांच में विभिन्न जिलों के एआरटीओ की अहम भूमिका सामने आई है।
मामले पर परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह का कहना है कि इस रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें परिवहन विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ रही है। ऐसे सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।