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मनुस्मृति पर मुखर, शाहबानो पर मौन.. महिला अधिकारों पर कांग्रेस के दोहरे मापदंड : राजेश्वर सिंह

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सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह।
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लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कांग्रेस पर महिला अधिकारों को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मनुस्मृति पर कांग्रेस के बयानों और महिलाओं के अधिकारों पर उसके दावों पर तीखा हमला किया। कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास और फैसलों का जवाब देना चाहिए। यदि उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है, तो विरोध का पैमाना धर्म देखकर अलग-अलग क्यों?
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डॉ. राजेश्वर सिंह ने शाहबानो मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी किया था। यह महिला अधिकारों की कीमत पर राजनीतिक दबाव के आगे झुकने का स्पष्ट उदाहरण था। डॉ. सिंह ने 2019 के तीन तलाक कानून का भी उल्लेख किया। कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के कानून पेश करने पर कांग्रेस ने इसके प्रमुख प्रावधानों का विरोध किया था। उन्होंने पूछा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली कांग्रेस तब उनके साथ मजबूती से क्यों नहीं खड़ी हुई। उन्होंने समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस की दशकों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार न होने पर भी सवाल उठाया। कहा 1937 का मुस्लिम पर्सनल लॉ आज भी लागू है जबकि स्वतंत्र भारत में 1955-56 में हिंदू पर्सनल लॉ में व्यापक सुधार किए गए थे।
राजेश्वर सिहं ने मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस के चयनात्मक विरोध पर भी टिप्पणी की। कांग्रेस नेता हिंदू धर्मग्रंथों में कथित भेदभावपूर्ण प्रावधानों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन अन्य धार्मिक ग्रंथों में मौजूद ऐसे ही आपत्तिजनक कथनों पर वे मुखरता नहीं दिखाते। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि महिला अधिकार किसी पार्टी की राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सांविधानिक समानता, गरिमा और न्याय का विषय हैं।
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