मेट्रो लाइन बिछाने के दौरान होने वाली खोदाई से संचार सेवाओं को बाधित होने से बचाने की कवायद बीएसएनएल ने शुरू कर दी है।
बीएसएनएल प्रशासन अलग से आउटर रिंग एरिया प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत मेट्रो के प्रस्तावित सात किलोमीटर लंबे रूट से गुजरने वाली भूमिगत फाइबर केबल लाइन को शिफ्ट किया जाएगा।
शिफ्टिंग उद्देश्य खोदाई के दौरान यूएफसी फाइबर लाइनों को होने वाले आशंकित नुकसान से बाधित होने वाली बेसिक फोन सहित इंटरनेट, मोबाइल व ब्राडबैंड सेवाओं को पटरी पर बनाए रखने का है।
मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले चरण में जल्दी खोदाई शुरू होने के साथ ही तय रूट पर भूमिगत फाइबर लाइनों को होने वाले आशंकित नुकसान से बचाने में जुट गया है बीएसएनएल प्रशासन।
इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से मेट्रो रूट के उस क्षेत्र का रोडमैप तैयार कर मेट्रो आउटर रिंग एरिया तैयार किया जा रहा है, जहां मेट्रो रेल बिछाने के लिए सबसे पहले खोदाई होगी।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो रूट बिछाते समय पिलर बनाने के लिए गहरी खोदाई की जाएगी।
इस दौरान इसके रूट में बिछी भूमिगत यूएफएसी के क्षतिग्रस्त होने से बेसिक फोन सेवा के साथ ही ब्राडबैंड, इंटरनेट व मोबाइल सेवाओं के बाधित होने से उपभोक्ताओं को खासी परेशानी होगी।
इस परेशानी से बचने के लिए ही पूर्वी परिमंडल के पीजीएम सुनील परिहार के निर्देश पर बीएसएनएल के तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर आउटर रिंग एरिया प्रोजेक्ट तैयार किया ज रहा है।
प्रोजेक्ट से जुड़े बीएसएनएल के एक उपमहाप्रबंधक स्तरीय अधिकारी ने बताया कि इस पर खर्च होने वाली राशि का विस्तृत विवरण तैयार कर किया जा रहा है।
जल्द ही मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को भेजा जाएगा ताकि वैकल्पिक व्यवस्था बनाने को वित्तीय संसाधन जुटाया जा सके।
हर एक्सचेंज होगा एक दूसरे से लिंकअप
मेट्रो रूट में पड़ने वाले हर एक्सचेंज को एक दूसरे से लिंकअप कर ब्रॉडबैंड सेवा को वाई-फाई युक्त किया जाएगा। मेट्रो रूट पर पड़ने वाले हर बीटीएस टॉवर को भी वायरलेस मोड सिग्नल युक्त बनाया जाएगा।
इससे किसी भी एक एक्सचेंज से जुड़ी यूएफसी के कटने पर उससे जुड़ी फोन लाइन सेवाओं को तत्काल दूसरे एक्सचेंज से लिंकअप कर संचार सेवाओं को बाधित होने से बचाया जा सके।