लजीज स्वाद और रसीली मिठास के लिए दुनिया भर में अपनी धाक जमाने वाले दशहरी आम का विदेश जाना मुश्किल नजर आ रहा है । फसल की टूट तेजी से शुरू हो गई है। मगर विदेशों में इसकी आपूर्ति करने वाले किसी भी निर्यातक ने अभी तक पहल नहीं की है। निर्यातकों की बेरुखी आम के छोटे साइज व खूबसूरती में कमी होना माना जा रहा है। मैंगो पैक हाउस के कर्मचारी मोहसिन खान के मुताबिक, खाड़ी देशों में आम भेजने को पैक हाउस तैयार है, पर अभी निर्यातक ने कोई मांग नहीं दी है। उन्होंने बताया कि पिछले सालों की अपेक्षा फसल भी काफी कमजोर है। इसके अलावा बारिश भी नहीं हो रही है जिससे आम का वजन नहीं बढ़ रहा है। आम में पहले जैसी खूबसूरती भी नहीं दिख रही है। इससे विदेशों में इसकी मांग कम होगी।
बाजार में नहीं रौनक, बागवान परेशान
बागवान पुतान रावत के मुताबिक, क्षेत्र में 20 से 25 फीसदी आम की फसल है। इतनी कम पैदावार के बावजूद बागवानों को इसके मुनासिब दाम नहीं मिल रहे हैं। उनका कहना है कि मंडी शुरू हुए 12 दिन हो गए पर रौनक नहीं है। मंडी में बाहर के खरीदार हंै नहीं, आढ़ती ही आम पहचान वाले व्यापारियों के यहां भेज रहे हैं। उन्होंने बताया कि आम तौर पर यहां दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व महाराष्ट्र के व्यापारी आम की खरीद करते हैं। मगर इस वर्ष एकाध व्यापारी ही पहुंचे हैं।
डाल की दशहरी 50 रुपये में
बुधवार को स्थायी मंडी में करीब 50 पेटी डाल की दशहरी पहुंची जो 50 से 55 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकी। आढ़ती सूफियान खान ने बताया कि डाल की दशहरी पिछले पांच दिनों से आ रही है। इसकी तादाद बढ़ रही है। उन्होंने बताया क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से किसानों का आम आया था। जो 50 से 55 रुपये किलो के हिसाब से बिका है। उनका मानना है कि जैसे मंडी में डाल के आम की आवक तेज होगी वैसे-वैसे इसके दामों में गिरावट होगी। दशहरी 30 से 35 रुपये में िबकेगी।