ओआरएस का घोल। (प्रतीकात्मक चित्र)
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दस्त से पीड़ित बच्चों की हालत गंभीर होने पर ओआरएस देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर ओआरएस के पैकेट बंटवाने और इसके फायदे बताने का फैसला लिया है।
एक जुलाई से शुरू होने वाले संचारी रोग अभियान के साथ ही इस वर्ष डायरिया रोको अभियान भी शुरू किया जा रहा है। आशा व स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों के बारे में जानकारी लेंगे। जो बीमार हैं, उन्हें अस्पताल पहुंचाएंगे। स्वस्थ बच्चों को भी ओआरएस का पैकेट और जिंक टैबलेट देंगे। बच्चों और उनके अभिभावकों को इसके प्रयोग के तरीके बताएंगे।
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जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य उपकेंद्र तक ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां भेजी जा रही हैं। करीब 10 लाख ओआरएस पैकेट केंद्रों पर भेज दिए गए हैं। सभी सीएमओ से अतिरिक्त मांग के बारे में जानकारी ली गई है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का कहना है कि बच्चों को बीमार होने से बचाने और उनकी मृत्युदर को कम करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
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बारिश के मौसम में विभिन्न स्थानों पर डायरिया के मामले सामने आते हैं। यह देखा गया है कि ओआरएस का पैकेट देने से डायरियाग्रस्त बच्चों को तात्कालिक तौर पर राहत मिल जाती है। इसी वजह से इस वर्ष डायरिया रोको अभियान शुरू किया गया है। वेक्टर जनित रोग विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. विकास सिंघल का कहना है पांच साल से कम उम्र के बच्चों वाले सभी घरों में ओआरएस का पैकेट देने और उसके बारे में लोगों को जागरूक करने का फायदा मिलेगा।