लखनऊ। राजधानी में नकली दवाओं की लगातार हो रही बरामदगी अब छिटपुट घटनाएं नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। बुधवार को विभिन्न ब्रांड की नकली दवाओं की बरामदगी ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इन दवाओं का निर्माण और सप्लाई नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है। पिछले तीन वर्षों में कई बड़ी कार्रवाई के बावजूद यह कारोबार थमता नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इनके उत्पादन और आपूर्ति चेन पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे गिरोह नए नाम और नए ठिकानों से फिर सक्रिय हो जाएंगे।
बुधवार को बरामद दवाओं में वे दवाएं शामिल हैं, जिनका रोजमर्रा के इलाज में सबसे अधिक उपयोग होता है। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लिवर रोग और एंटीबायोटिक दवाएं प्रमुख हैं। ऐसे मामलों से साफ है कि गिरोह ने उन दवाओं को निशाना बनाया है जिनकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है और जिनकी बिक्री बड़े पैमाने पर होती है।
जान भी ले सकती हैं नकली दवाएं
चिकित्सकों के अनुसार नकली दवाओं में या तो आवश्यक सक्रिय तत्व नहीं होता या उसकी मात्रा मानक से कम अथवा अधिक होती है। इससे बीमारी बढ़ सकती है। एंटीबायोटिक के मामलों में दवा प्रतिरोध का खतरा बढ़ जाता है, जबकि गंभीर मरीजों में गलत दवा जानलेवा भी साबित हो सकती है।
देर रात तक जारी रही कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने बुधवार देर रात तक अमीनाबाद समेत कई स्थानों पर कार्रवाई जारी रखी। अधिकारियों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे हैं और सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
दवा खरीदते समय बरतें ये सावधानियां
दवा का रंग, गंध या पैकिंग असामान्य लगे तो उसका इस्तेमाल न करें।
बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि अवश्य जांचें।
होलोग्राम, क्यूआर कोड या अन्य सुरक्षा चिह्न देखें।
केवल लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें।
हमेशा खरीद का बिल लें और सुरक्षित रखें।
पहले भी पकड़ी गई हैं नकली दवाएं
अगस्त 2023 : अमीनाबाद व बस स्टेशन क्षेत्र से दो करोड़ रुपये की 65 हजार से अधिक नकली गोलियां बरामद।
नवंबर-दिसंबर 2023 : अमीनाबाद के वीडीएस फार्मा पर छापे में नकली दवाएं मिलीं, नेटवर्क आगरा, चेन्नई और पुडुचेरी तक जुड़ा।
जून 2025: काकोरी में 1.2 करोड़ रुपये की नकली ऑक्सीटोसिन दवाएं और पैकेजिंग सामग्री बरामद।
31 अगस्त-1 सितंबर 2025 : पारा में दो करोड़ रुपये की नकली ऑक्सीटोसिन फैक्ट्री का भंडाफोड़।
22 दिसंबर 2025 : विधानसभा में मामला गूंजा, सरकार ने एसआईटी रिपोर्ट पेश कर एनएसए व गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का भरोसा दिया।
जनवरी-फरवरी 2026 : ईडी ने कफ सिरप सिंडिकेट पर कार्रवाई कर 28.5 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की।
14 फरवरी 2026: एसटीएफ ने कोडीन आधारित कफ सिरप गिरोह के मुख्य आरोपी अमित यादव को गिरफ्तार किया।
दवाओं की जांच करती टीम।
दवाओं की जांच करती टीम।
दवाओं की जांच करती टीम।