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Lucknow News: भारत में अंगदान की स्थिति बेहद चिंताजनक

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लखनऊ। वर्ल्ड लिवर डे पर कानपुर रोड स्थित कॉरपोरेट अस्पताल में बुधवार को लिवर डोनेशन, ट्रांसप्लांट से जुड़े मिथकों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि भारत में अंगदान की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हर साल करीब 30 हजार मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन तीन हजार को ही इसकी सुविधा मिल पाती है।



डॉक्टरों ने बताया कि इनमें भी 10 प्रतिशत ट्रांसप्लांट कैडेवेरिक डोनर से संभव हो पाते हैं। यह अंगदान की गंभीर कमी को दर्शाता है, जिसे दूर करने के लिए समाज में जागरूकता और सहभागिता की जरूरत है। कार्यक्रम में लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों और उनके डोनरों ने भी हिस्सा लिया। ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य जीवन जी रहे मरीज व डोनर अंगदान के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड लिवर ट्रांसप्लांट डॉ. आशीष मिश्रा ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट के बाद डोनर को कोई गंभीर समस्या नहीं होती। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित व प्रभावी है। लिवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को सामान्य जीवन में लौटने में करीब महीनाभर लगता है। डोनर एक महीने के अंदर ही सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकता है।
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