विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश सरकार को एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव की याद आई है। सूबे के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए जल्द ही औपचारिक आदेश जारी होंगे। चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराए जाएंगे।
दरअसल, प्रदेश सरकार विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को खुश करना चाहती है। उसे लग रहा है कि छात्रसंघ चुनाव कराने से युवा ब्रिगेड सपा के पाले में खड़ा हो जाएगा।
छात्रसंघ चुनाव पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिबंध लगा दिया था। 2012 में जब अखिलेश यादव की सरकार बनी तो 21 मार्च 2012 को चुनाव से प्रतिबंध हटा लिया गया। हालांकि उस समय चुनाव अनिवार्य नहीं किए गए। ऐसे में इक्का-दुक्का महाविद्यालयों ने तो चुनाव कराए लेकिन ज्यादातर ने इससे दूरी ही बनाए रखी।
इसके बाद सरकार ने गत 15 जनवरी को फिर 21 मार्च 2012 वाला पुराना आदेश नए सिरे से जारी कर दिया, लेकिन यह आदेश प्रभावी न हो सका। प्रतिबंध हटने के चार साल से अधिक बीतने के बाद भी लखनऊ विश्वविद्यालय तक ने छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए। इसको लेकर युवाओं में खासी नाराजगी है।