पिकप भवन में आग लगी नहीं थी बल्कि साजिशन लगाई गई थी। इसका खुलासा जांच समिति की रिपोर्ट में हुआ है। लोन से संबंधित सैकड़ों फाइलें इस घटना में राख हो गईं। इन फाइलों का डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ था। अपने स्पष्ट निष्कर्ष के साथ समिति ने रिपोर्ट शनिवार को शासन को सौंप दी।
जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रथमदृष्टया पिकप भवन में आग लगाया जाना प्रतीत हो रहा है। विभाग के अधिकारियों व कर्मियों के विरोधाभासी बयान और सूचना देने में हुई देरी से भी साजिश के तहत आग लगाए जाने की घटना को बल मिल रहा है। यह आग पिकप भवन के प्रथम तल पर स्थित प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एवं इंवेस्टमेंट कार्पोरेशन उत्त प्रदेश लिमिटेड (पिकप) की ओर से उद्यमियों को उद्योग की स्थापना के लिए ऋण दिया जाता रहा है।
पूर्व में दिए गए लोन की पत्रावलियों का अब तक डिजिटलाइजेशन ही नहीं हुआ था। इन फाइलों का ऑडिट किया जाना प्रस्तावित था। फाइलों का ऑडिट होता तो कई बड़े अधिकारी इसकी जद में आते और एक बहुत बड़े घोटाले पर से पर्दा उठ जाते। पिकप के घोटालों पर पर्दा पड़ा रहे, इस लिए यह आग साजिशन लगाई गई।
शार्ट सर्किट के नहीं मिले सुबूत
सूत्रों की मानें तो जांच अधिकारियों को शार्ट सर्किट के कोई सुबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि शार्ट सर्किट से आग लगी होती तो ‘पैनल डिस्टर्ब’ जरूर होता। लेकिन ऐसा नहीं था। बिल्डिंग के एयर कंडीशन या ऐसी में भी शार्ट सर्किट के सुबूत नहीं मिले हैं।