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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 25 हजार रुपये करने की मांग, सरकार बोली- रिपोर्ट पर होगा निर्णय

Tue, 20 Mar 2018 10:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने और उन्हें नियमित करने की मांग को लेकर विपक्ष ने मंगलवार को विधानसभा से बर्हिगमन किया। विपक्ष ने मानदेय 25000 रुपये महीना और उन्हें नियमित करने का प्रस्ताव सदन से पास कराकर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की।

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प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के सवाल पर बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री अनुपमा जायसवाल ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार सरकार निर्णय लेगी।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। इससे असंतुष्ट अदिति ने कहा कि दिल्ली व अन्य राज्यों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बहुत अधिक है, जबकि प्रदेश में उन्हें सिर्फ चार हजार रुपये मानदेय मिलता है। नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मांग करते हैं तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं।
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उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 25 हजार रुपये महीने करने और नियमित करने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने को कहा। कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय कुमार सिंह लल्लू ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। बसपा विधायक दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि सरकार केवल वादा करती है, काम नहीं करती। इसके बाद सपा-बसपा और कांग्रेस सदस्यों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ध्यान न देने का आरोप लगाते हुए सदन का बर्हिगमन किया।

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27 को फिर विधानसभा में पेश होगा यूपीकोका बिल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
विधान परिषद में ध्वनिमत से नामंजूर होने के बाद संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक (यूपीकोका) 27 मार्च को फिर विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने सदन में मंगलवार को इसकी जानकारी दी। विधानसभा में सत्ता पक्ष के पास दो तिहाई से ज्यादा बहुमत है।

प्र्रदेश में संगठित अपराध पर नियंत्रण के लिए यह बिल बीते 21 दिसंबर को विधानसभा में पारित होने के बाद उच्च सदन को भेजा गया था। उच्च सदन ने बिल को प्रवर समिति को भेजा था। प्रवर समिति की सिफारिशों के साथ बिल यह बिल बीते 13 मार्च को परिषद में पेश किया गया था, लेकिन वहां विपक्ष का बहुमत होने से बिल ध्वनि मत से गिर गया था।
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