लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ व मुरादाबाद की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे पर सोमवार को विधानसभा में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोक-झाेंक हुई।
विपक्ष ने निजीकरण को कर्मचारियों व उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार पर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि इससे बिजली व्यवस्था में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिलेगी।
निजीकरण के फैसले के विरोध में सपा ने सदन से बहिर्गमन किया तो कांग्रेससदस्य वेल में आ गए। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने वेल में आने पर कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी बात सुनने से इन्कार कर दिया। वहीं निजीकरण पर सदन में चर्चा की मांग पर अध्यक्ष ने फैसला सुरक्षित रख लिया। वह मंगलवार को इस पर निर्णय देंगे।
कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने कहा, बिजली के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी आंदोलित हैं। नियामक आयोग के आदेशों का उल्लंघन कर निजीकरण किया जा रहा है। इससे बिजली दरें बढ़ेंगी, कर्मचारियों का वेतन कम होगा तथा उनका शोषण होगा। नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी व बसपा के नेता लालजी वर्मा ने भी उनके प्रस्ताव का समर्थन करते हुए दो घंटे की चर्चा कराने की मांग की।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने विपक्ष केआरोपों को नकारते हुए कहा, बिजली आपूर्ति में पावर कॉर्पोरेशन को 84 पैसे प्रति यूनिट का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पावर फॉर ऑल के लिए इस अंतर को समाप्त करना है। जिन जिलों में निजीकरण का फैसला किया गया है वहां लाइन हानियां भी ज्यादा हैं।
मेरठ में 34.39, वाराणसी में 28.34, गोरखपुर में 30.10, मुरादाबाद में 32.33 तथा लखनऊ में 36.16 प्रतिशत लाइन हानियां हैं। विद्युत अधिनियम में फ्रेंचाइजी नियुक्त करने का प्रावधान है। जिस तरह उपभोक्ताओं का बोझ बढ़ रहा है उसे देखते हुए निवेश की भी आवश्यकता है।
950 करोड़ के निवेश की जरूरत लखनऊ में ही है। सारे तथ्यों पर विचार करने के बाद ही फ्रेंचाइजी नियुक्त करने का फैसला किया गया है। कहा कि सरकारी विभागों पर 10 हजार करोड़ बकाया है। इस साल 2200 करोड़ वसूले गए हैं। निजीकरण से कर्मचारियों के हितों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
ऊर्जा मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने सरकार पर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए बहिर्गमन किया। कांग्रेस सदस्य वेल में आए तो अध्यक्ष ने उन्हें सुनने से मना कर दिया।