शेरपुरलवल गांव में सोमवार को चकबंदी की बैठक होनी थी जिसमें अधिकारियों के न पहुंचने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने जमकर हंगामा काटा। इसी बीच उत्तेजित किसानों की मौके पर मौजूद राजस्व विभाग के कर्मचारियों से अधिकारियों के मौके पर न आने के कारण तीखी बहस भी हुई।
शेरपुरलवल गांव में पिछले कई वर्षों से गांव में चकबंदी होनेे और न होने का मुद्दा चल रहा है। यहां ज्यादातर किसान चाहते हैं कि चकबंदी न हो। चकबंदी आयुक्त ने चकबंदी आगे बढ़ाने के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन कर सोमवार को पंचायत भवन में बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में पहुंचे चकबंदी लेखपाल राकेश यादव और ज्ञानेंद्र सिंह के सामने सैकड़ों ग्रामीणों ने चकबंदी न कराए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी की और आलाधिकारियों को मौके पर बुलाए जाने की मांग की। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद नायाब तहसीलदार मौके पर पहुंचे, जहां ज्यादातर ग्रामीण चकबन्दी न कराए जाने के पक्ष में दिखे।
सूचना के बाद एसडीएम मोहनलालगंज किंशुक श्रीवास्तव, चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी निदेशालय विक्रमादित्य वर्मा, उपसंचालक श्रीप्रकाश राय, चकबंदी क्षेत्राधिकार परवेज अंसारी, नायब तहसीलदार व संबंधित अन्य आलाधिकारी पहुंचे। अफसरों ने ग्रामीणों से चकबंदी कराने या न कराए जाने को लेकर हस्ताक्षर कराए। 272 लोगों ने चकबंदी न होने के पक्ष में हस्ताक्षर किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को चकबंदी न कराए जाने का अश्वासन दिया, इससे पूर्व 25 नवम्बर 2018 में भी हस्ताक्षर अभियान चला था। जिसमें 240 किसानों ने चकबंदी न कराए जाने की बात कही थी जबकि 103 किसानों ने चकबंदी कराने के पक्ष में हस्ताक्षर किये थे। तीन वर्ष पूर्व गांव के एक पक्ष से 383 लोगों ने हस्ताक्षर कर चकबंदी न कराए जाने को डीएम व आलाधिकारियों से गुहार की थी।