उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा के साथ ही सत्ता शीर्ष को लेकर अटकलें और बढ़ गई हैं। देश की राजनीति के केंद्र उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन होगा , सरकार किसकी बनेगी, इस सब पर हर खास-ओ-आम की नजर टिकी है। ज्योतिषियों की राय भी बंटी हुई है। कई ज्योतिषियों का कहना है भाजपा को बहुमत मिलेगा, तो कई ने तमाम समस्याएं भी गिनाईं। नक्षत्र गत्यान्वेषी डॉ. शंकर चरण त्रिपाठी, अखिल भारतीय विद्वत परिषद के महासचिव व ज्योतिषाचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय, मेरठ के ज्योतिषाचार्य विनोद पुरोहित, लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पं. राधेश्याम शास्त्री और सप्तऋषि महर्षि सुषैन ने ग्रह-गोचर की चाल व ऊर्जा के संदेशों के आधार पर चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी की है। इनका कहना है, 20 जनवरी तक का समय बहुत ज्यादा उथल-पुथल वाला रहेगा।
नए क्षत्रप के भाग्योदय में भी बाधा, पुराने वाले को भी दिक्कत
अखिल भारतीय विद्वत परिषद के महासचिव ज्योतिषाचार्य डॉ. कामेश्वर उपाध्याय कहते हैं, जनवरी से मार्च तक चुनावी महीने हैं, जिस पर कालसर्प योग की जबरदस्त छाया है। इसका प्रभाव टिकट वितरण के साथ ही देखने को मिलने लगेगा। वृष और वृश्चिक राशि वालों की कुंडली में अगर राजयोग नहीं है, तो उनके लिए मुश्किलें होंगी। कुंभ राशि वाले लोगों पर शनि की साढ़े साती चल रही, जो सुख में बाधक है। फरवरी में राहु-मंगल का षडाष्टक योग बन रहा है, यह विस्फोटक होगा। पुराने चेहरे हारेंगे भी और कई टिकट से भी वंचित रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के लिए चीेजें काफी बदलेंगी। उनके ग्रहयोग 2017 में ज्यादा बेहतर थे। आदित्य का अ और अखिलेश का अ, दोनों के आगे बढ़ने का संकेत हैं। कालसर्प योग ने पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ते कदम बांध दिए हैं। दक्षिण व महाराष्ट्र का दखल प्रचार कार्य में भूमिका के कारण बढ़ जाएगा।
भाजपा फिर सत्ता में आएगी
नक्षत्र गत्यान्वेषी डॉ. शंकर चरण त्रिपाठी कहते हैं, राहु धनु राशि में भ्रमण कर रहा है, यह संकट पैदा करेगा। योगी के मुख से निकले शब्द बुआ और बबुआ (जो 17 बार से अधिक बोला जा चुका है) में दो-दो ब हैं। बुआ में भी आ है और बबुआ में भी आ है। अ-आ की रचना 31 की संख्या है। 31 का मूलांक 4 है। मकर राशि के भारत में उत्तर प्रदेश को चार का लग्न भाव प्राप्त है। अत: योगी 31 बार अधिकतम, 13 बार न्यूनतम, अपने विपक्षियों पर प्रहार करेंगे।
बुआ में उ की मात्रा लगी है, यह तीन की संख्या है। 31 में 3 घट जाएगा, तो एक बचेगा यानी मायावती भारतीय जनता पार्टी के नजदीक रहेंगी। दुर्भाग्यवश, बबुआ में भी छोटा उ है। इसके कारण बाइसिकिल यानी अखिलेश यादव 31 की संख्या रखते हैं, जो योगी आदित्यानाथ के 31 नंबर से मिलता है। यानी बाइसिकिल तगड़ी चोट देगी। लेेकिन, योगी का शनि छठे भाव का है। जो षडाष्टक योग बना रहा है, यानी मुस्लिमों के वोटों का बंटवारा होगा और वे योगी की तरफ झुकेंगे। अखिलेश यादव ने साल भर में 17बार से ज्यादा ‘ठोक’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ठोक का उलटा होता है कठ यानी अपने ही द्वारा प्रस्तावित अस्थायी नीतियों को जनता के बीच में ले जाने के कारण 31 की संख्या उलट कर 13 हो जाती है।
गुंडा, माफिया बदमाश, जो कि एक नंबर है। यह एक आगे जुड़कर 113 बनाता है। इससे जनता में गलत संदेश जाएगा, जो इनको 113 की संख्या पर सिमटा देती है। बबुआ के दो ब, बुआ के एक ब यानी तीन ब मिलकर, तीन की संख्या 31 में से घटा देता है। योगी की अगुवाई में भाजपा करीब 300 सीटें जीतेगी। कांग्रेस मुसलमानों और स्त्रियों को अधिक मैदान में उतारेगी। बसपा को 12, 21, 39 और 48 तो कांग्रेस को 9, 18, 27 सीटें मिल सकती हैं।