शिक्षा, राजस्व, परिवहन समेत दस विभाग अब मैनुअली शासनादेश (जीओ) जारी नहीं कर सकेंगे।
इन विभागों की ओर से सरकारी वेबसाइट पर जारी शासनादेश ही वैध माने जाएंगे।
मैनुअली शासनादेश जारी करने का मामला सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने इस व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य सचिव ने पिछले दिनों बैठक कर शासकीय कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए सभी विभागों को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन शासनादेश जारी करने और उसे सरकारी वेबसाइट http://shasanadesh.up.nic.in पर अपलोड कराने को कहा था।
सरकारी कार्यों में पारदर्शिता के लिहाज से यह काम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्राथमिकता वाले कामों में शामिल है।
मुख्य सचिव ने पहले चरण में एक सितंबर से 10 विभागों को यह काम शुरू करने का निर्देश दिया था।
अब उन्होंने सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को शासनादेश जारी कर फैसले का कड़ाई से पालन कराने को कहा है।
मुख्य सचिव ने कहा है कि 10 विभागों में इसके सफलतापूर्वक लागू होने के बाद एक नवंबर से 25 अन्य विभागों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
एक जनवरी 2014 से सभी विभाग ऑनलाइन शासनादेश जारी करने लगेंगे। साथ ही निर्देशित किया है कि किसी भी दशा में इन विभागों में कोई भी शासनादेश मैनुअली जारी न किया जाए।
ऐसे प्रकरण जानकारी में आने पर दोषी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उस्मानी ने कहा है कि इन दस विभागों के किसी भी शासनादेश को तभी वैध माना जाए जब वे सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हों। प्रमुख सचिव व सचिव इस व्यवस्था की व्यक्तिगत स्तर पर मॉनिटरिंग करेंगे।
वित्त विभाग ने लागू की व्यवस्था
वित्त विभाग ने शासन की इस पहल को हाथोंहाथ लेते हुए अपने यहां इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है।
सचिव वित्त हिमांशु कुमार ने वित्त विभाग में इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि पहले चरण में जिन दस विभागों में यह व्यवस्था शुरू की जानी है, वित्त विभाग उनमें शामिल नहीं है।