केजीएमयू में दस नहीं, केवल चार मंजिला बनेगी इमारत
लखनऊ। केजीएमयू के ऑर्थोपेडिक्स विभाग से अलग होकर बनने वाले चार विभागों को पहले ही कदम पर जोर का झटका लगा है। इन विभागों के लिए अब 10 के बजाय चार मंजिला भवन ही बनेगा। सालभर बाद इसके बजट में कटौती कर127 करोड़ की जगह करीब 80 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। दूसरी तरफ अभी तक इन विभागों के लिए नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टॉफ भी नहीं दिया गया है। इससे एमसीआई की ओर से स्वीकृत एमसीएच की चार सीटों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
केजीएमयू के ऑर्थोपेडिक्स विभाग से अलग होकर स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग, पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग, स्पाइन सर्जरी और ऑर्थोप्लास्टी विभाग बनाया जा रहा है। स्पोर्ट्स मेडिसिन और पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स के लिए वैकल्पिक तौर पर शताब्दी अस्पताल में वार्ड भी बना दिया गया है। वार्ड की साज-सज्जा पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किया जा चुका है। यह अलग बात है कि पैरामेडिकल स्टॅाफ न मिलने से ये विभाग शुरू नहीं हो पाए हैं। 13 जून 2018 को स्पोर्ट्स मेडिसिन और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग को मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया ने मंजूरी दी। इसके बाद अन्य दोनों विभाग का भी प्रस्ताव बना। इसी समय तय किया गया कि लिंब सेंटर के पीछे स्थित जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाई जाए। जहां चारों विभागों को स्थापित किया जाएगा। दो अंडरग्राउंड सहित 10 मंजिला भवन के लिए करीब 127 क रोड़ का प्रोजेक्ट शासन को भेजा गया। शासन ने बजट अधिक होने की दुहाई देकर प्रस्ताव को संशोधित करने के लिए कहा। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने दो दिन पहले नया प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें 10 मंजिला भवन को चार मंजिला कर दिया गया है। उसकी लागत घटाकर करीब 80 करोड़ कर दी गई है। चारों विभागों के विभागाध्यक्षों ने भी एक-एक मंजिला भवन से काम चलाने पर सहमति व्यक्त की है।
बेस मजबूत रखने पर सहमति
सूत्रों की मानें तो नए बनने वाले विभागों के विभागाध्यक्षों ने इस बात पर आपत्ति की कि एक मंजिला भवन में उनका काम नहीं चल पाएगा। मरीजों की ओपीडी, वार्ड, लैब के साथ ही क्लास रूम के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाएगी। इस पर कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट, वित्त अधिकारी मो. जमा, कुलसचिव राजेश कुमार राय व अन्य लोगों ने बीच का रास्ता निकाला। तय किया गया है कि बेसमेंट इस तरह बनाया जाएगा कि भविष्य में 10 मंजिला भवन तैयार किया जा सके। इस पर विभागाध्यक्षों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
एमसीएच की सीटों पर संकट के बादल
अभी तक ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एमएस की 16 सीटें हैं। अभी यहां एमसीएच की सीटें नहीं हैं। पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग और स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग के लिए एमसीआई ने चार-चार एमसीएच की सीटों पर मंजूरी दी है। जबकि अन्य दोनों विभागों के लिए प्रक्रिया चल रही है। जिस तरह से दोनों विभागों को खोलने में देरी हो रही है, इससे एमसीएच की सीटों पर मान्यता खत्म होने का संकट भी मंडरा रहा है।
दूसरे प्रदेशों को भी मिलेगा फायदा
अभी तक यूपी में स्पोर्ट्स मेडिसिन की सुविधा नहीं है। यहां के खिलाड़ियों, पुलिस व अन्य सुरक्षा सेवाओं के जवानों को इलाज के लिए नई दिल्ली, चंडीगढ़ जैसे स्थानों पर जाना पड़ता है। इसी तरह पीडियाट्रिक सर्जरी का भी अलग से कहीं विभाग नहीं है। केजीएमयू में यह सुविधा शुरू होने से यूपी के साथ ही आसपास के प्रदेशों को भी फायदा मिलेगा। दोनों विभागों की ओपीडी में करीब ढाई सौ मरीज आते हैं।
शासन को भेजा गया प्रस्ताव
शासन की आपत्ति के बाद संशोधित प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि इसे मंजूरी मिल जाएगी। शासन की मंजूरी मिलते ही नए विभागों के लिए भवन निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। विभागों को खोलने की कवायद चल रही है। मैनपॉवर की समस्या है, जिसमें बीच का रास्ता निकाला जा रहा है।
- राजेश कुमार राय, कुलसचिव