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स्नातक के बाद सिर्फ नौ फीसदी युवा करते हैं पीजी की पढ़ाई

Mon, 30 Sep 2019 01:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो सचिन त्रिपाठी, लखनऊ
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उच्च शिक्षा के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है, लेकिन अब भी परास्नातक स्तर पर सिर्फ 9 फीसदी विद्यार्थी ही पहुंच रहे हैं। विवि अनुदान आयोग की रिपोर्ट बताती है कि स्नातक करने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत जहां 81 फीसदी होता है, वहीं परास्नातक स्तर पर यह आंकड़ा महज नौ फीसदी रह जाता है। परास्नातक स्तर के आंकड़े बताते हैं कि बेटियों की संख्या बेटों से ज्यादा है। परास्नातक स्तर पर बेटियों की संख्या 54 फीसदी है।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में देशभर के विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या दी है। इसके अनुसार वर्ष 2017-18 में देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल मिलाकर तीन करोड़ 26 लाख 10 हजार 784 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें से सबसे ज्यादा संख्या स्नातक विद्यार्थियों की है। कुल संख्या में इनका प्रतिशत 81.14 फीसदी है, जबकि परास्नातक में यह आंकड़ा केवल 9 फीसदी ही रह जाता है। इसके बाद 7.93 प्रतिशत विद्यार्थी डिप्लोमा, .50 फीसदी पीएचडी, .60 फीसदी समेकित पाठ्यक्रम, .45 फीसदी पीजी डिप्लोमा, .28 फीसदी सर्टिफिकेट तथा .10 फीसदी एमफिल के विद्यार्थी हैं।

शोध के मामले में प्रबंधन तीसरे नंबर पर
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी बात है कि सबसे ज्यादा शोध विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे हैं। वर्ष 2017-18 के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल एक लाख 61 हजार 412 विद्यार्थी शोध कर रहे हैं। इनमें विज्ञान में सबसे ज्यादा 41 हजार 844 शोधार्थी हैं। इसके बाद सामाजिक विज्ञान का नंबर आता है जहां 18 हजार 366 शोधार्थी हैं। इसी तरह प्रबंधन में नौ हजार 478 शोधार्थी, सात हजार 850 शोधार्थी भारतीय भाषाओं मे, सात हजार 302 शोधार्थी शिक्षाशास्त्र में हैं। हालांकि पीएचडी करने के मामले में छात्र छात्राओं से आगे हैं। कुल शोधार्थियों में 92 हजार 570 छात्र और 68 हजार 842 छात्राएं हैं।
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प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होना बड़ी वजह
कॅरिअर विशेषज्ञ विजय प्रताप सिंह के अनुसार, ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षा की अर्हता स्नातक होती है, इसलिए स्नातक के बाद युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने लगते हैं। परास्नातक की पढ़ाई के लिए केवल वही युवा करते हैं जो शिक्षण के क्षेत्र में जाते हैं। कई बार छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने से रोका जाता है, इसलिए भी वे परास्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला ले लेती हैं।
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