तदर्थ शिक्षकों को स्थायी करने को लेकर एक बार फिर रार छिड़ गई है। 25 जनवरी 1999 तक नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को स्थाई करने के सरकार के निर्णय का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है।
संगठनों का कहना है कि सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में तदर्थ शिक्षकों को रखने का अधिकार प्रबंधकों के पास 30 दिसंबर 2000 तक था। इसलिए तब तक रखे गए तदर्थ शिक्षकों को पहले चरण में हर हाल में स्थायी किया जाना चाहिए।
माध्यमिक शिक्षा परिषद से सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में संबद्ध प्राइमरी स्कूलों (कक्षा आठ तक) के लिए शिक्षकों की भर्ती का अधिकार प्रबंधन के पास है।
इसके बाद एलटी, प्रवक्ता व प्रधानाचार्य के पदों पर भर्ती का अधिकार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पास है। राज्य सरकार ने वर्ष 1981 में कठिनाई निवारण अधिनियम बनाया था।
इसमें कॉलेज प्रबंधन को यह अधिकार दिया गया कि छात्र हितों के लिए वे जरूरत पर तदर्थ शिक्षक रख सकेंगे, लेकिन आयोग से स्थायी नियुक्ति के बाद इन्हें हटा दिया जाएगा।