फर्जीवाड़े में माहिर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का त्रिवेणीनगर और फैजुल्लागंज में एक बड़ा कारनामा सामने आया है।
सारी हदों को पार करते हुए एलडीए के सुपरवाइजर और जूनियर इंजीनियर नक्शा पास कराने के नाम पर वसूली कर रहे हैं। यहां जिस भी भवन में निर्माण किया जा रहा है, वहां घर-घर जाकर जमकर वसूली की जा रही है।
सच तो यह है कि ये दोनों ही कॉलोनियां अनाधिकृत हैं। इनका ले आउट ही नहीं है और एलडीए इनका नक्शा पास ही नहीं कर सकता है।
मुख्य नगर नियोजक का भी साफ कहना है कि प्राधिकरण इन दोनों ही इलाकों में कोई भी मानचित्र नहीं पास कर सकता है। यहां की जनता पर दबाव देना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
शिकायत में कहा गया कि वसूली की मांग न पूरी होने पर अवर अभियंता एमके शर्मा आए थे। इस बारे में जब एमके शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कम से कम नक्शा जमा तो करा देना चाहिए।
नक्शा पास हो सकेगा या नहीं, इस मुद्दे पर उनका कोई जवाब नहीं था। इसके बाद जब मुख्य नगर नियोजक जेएन रेड्डी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि त्रिवेणी नगर और फैजुल्लागंज क्षेत्र प्राधिकरण के दस्तावेजों में कॉलोनियां अनाधिकृत हैं।
इनका कोई भी विन्यास पास नहीं हो सका है। फिलहाल एलडीए इनका मानचित्र नहीं पास कर सकता है।
जब रोकना था निर्माण तब नहीं रोका
त्रिवेणी नगर और फैजुल्लागंज दोनों ही कॉलोनियां प्राधिकरण के इंजीनियरों की गलती से अनाधिकृत कॉलोनी बन गईं। दोनों ही भूमि वर्षों पहले एलडीए को अधिग्रहित करनी थीं। फैजुल्लागंज तो बाकायदा नोटिफाई क्षेत्र था।
इंजीनियरों की गलती से यहां लगातार अवैध निर्माण किया जाता रहा। त्रिवेणी नगर-1, 2 और 3 में बंटा है। इसके अलावा कई मोहल्ले भी यहां हैं।
लगभग 21000 मकान और सवा दो लाख के करीब आबादी इस क्षेत्र में रहती है। नगर निगम ने यहां मकान नंबर दिए। जल संस्थान ने वाटर और लेसा ने बिजली का कनेक्शन दिया। लोग हाउस टैक्स जमा करते हैं।
ऐसे में कॉलोनी अवैध और नियमित के बीच में है यानी की अनाधिकृत है। इसलिए यहां का मानचित्र नहीं पास किया जा सकता है।
शासन में लंबित मानचित्र पास करने का प्रस्ताव
राजधानी की अनाधिकृत कॉलोनियों में मानचित्र पास करने का प्रस्ताव शासन में लंबित है। विकास शुल्क और कुछ अन्य मुद्दों के चलते नियम धरातल पर नहीं उतर पा रहा है।
इस नियम के आने के बाद त्रिवेणी नगर और फैजुल्लागंज में मानचित्र पास कराए जाने लगेंगे। मगर फिलहाल ऐसा कोई भी नियम नहीं है।