मामले की जांच कर रहे एडीएम एफआर अवनीश सक्सेना ने बताया कि इस मामले में रैन बसेरा में 26 की रात ठहरे आठ जरूरतमंदों से बातचीत करने पर उन्होंने वितरित कंबल वापस न लिए जाने की बात कही। इतना ही नहीं केजीएमयू प्रशासन की तरफ से निगरानी को तैनात गार्डों ने भी किसी को कंबलों के साथ रैन बसेरा से बाहर जाते नहीं देखा, न ही आसपास के किसी सीसीटीवी फुटेज में ही ऐसा कुछ संदिग्ध मिला है।
जांच में यह बात जरूर सामने आई कि जो निजी संस्था अस्थायी रैन बसेरा चला रही है, वह रात्रि में ठहरने वाले तीमारदारों को जरूरत पड़ने पर अपने संसाधनों से एक तय धरोहर राशि जमा कर कंबल देती है।
एडीएम एफआर ने बताया कि केजीएमयू के ही एक अन्य अस्थायी रैन बसेरा के पास ठंड लगने से हुए एक लावारिस की संदिग्ध मौत की जांच पोस्टमार्टम न हो पाने के कारण शुरू नहीं हो पाई।
केजीएमयू प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मृतक के मुंह से झाग भी निकल रहा था। मृतक की पहचान न हो पाने के कारण विधिक प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कार्य 72 घंटे बाद ही किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में रविवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारण का खुलासा हो सकेगा।
एडीएम वित्त राजस्व ने बताया कि जिला प्रशासन की सख्ती के बाद केजीएमयू प्रशासन ने परिसर में सभी अस्थायी व स्थायी रैन बसेरों में जमीन पर बिछाने के लिए पॉलीथिन व मैट की व्यवस्था के साथ ही अतिरिक्त कंबल भी उपलब्ध कराए हैं।
प्रशासन की तरफ से केजीएमयू प्रशासन की ओर से मांगे जाने पर नगर निगम व व्यापारिक संगठनों की मदद से तीमारदारों को गर्म कपड़े, कंबल, मैट व गद्दे दिए जाएंगे।