फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लिफ्ट में साढ़े तीन घंटे डॉक्टरों के साथ फंसी रही प्रसूता की मौत

Thu, 13 Aug 2015 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में बुधवार तड़के करीब 3 बजे गंभीर मरीज को ले जा रही लिफ्ट रास्ते में फंस गई। लिफ्ट में मरीज के साथ दो रेजीडेंट डॉक्टर, एक कर्मचारी और एक तीमारदार था।
विज्ञापन


अचानक लिफ्ट रुकने से सभी लोग दहशत में आ गए। मोबाइल फोन से कॉल करने की कोशिश की गई तो सिग्नल नहीं मिला। दरवाजा पीटा गया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। काफी देर बाद बाहर तीमारदारों को जब घटना का पता चला तो वहां हड़कंप मच गया।

किसी तरह लिफ्ट के दरवाजों को फैलाकर अंदर हवा जाने का रास्ता बनाया गया, पाइप से आक्सीजन दी गई। करीब तीन घंटे बाद ओटिस कंपनी के कर्मचारियों के आने पर लिफ्ट चली।
विज्ञापन


सभी को बाहर निकाला गया। मरीज को ट्रॉमा वेंटीलेटर यूनिट ले जाया गया। जहां उसकी कुछ देर बाद मौत हो गई। उधर इस दौरान लिफ्ट में एक महिला रेजीडेंट, वार्ड आया, मरीज का तीमारदार पूरी तरह से बेहोश हो चुके थे जबकि, एक अन्य रेजिडेंट बेसुध हालत में बाहर निकाला गया।

क्वीन मेरी में भर्ती लखीमपुर निवासी कृष्णकुमार की पत्नी शिवकांती (25) को रात को 11.30 बजे प्रसव हुआ था। अचानक रक्तस्राव से उसकी स्थिति गंभीर हो गई। शिवकांती को ऑक्सीजन सपोर्ट देकर बचाने की कोशिश की गई।

सेकंड और थर्ड फ्लोर के बीच फंसी लिफ्ट

शिवकांती की स्थिति नहीं सुधरी तो ट्रॉमा सेंटर की वेंटीलेटर यूनिट में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। रात 2.30 बजे उसे लेकर तीन रेजीडेंट डॉक्टर, एक लेबर रूम का कर्मचारी और मरीज का परिवारीजन ट्रॉमा सेंटर के लिए निकले थे।

वहां पहुंचने के बाद मरीज को लेकर लिफ्ट से थर्ड फ्लोर पर स्थित वेंटीलेटर यूनिट जाने के दौरान अचानक सेकंड व थर्ड फ्लोर के बीच लिफ्ट फंस गई।

भीतर से लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया, लेकिन दो फ्लोर के बीच में फंसने के कारण उनकी आवाज कोई नहीं सुन पाया। काफी देर बाद लिफ्ट के पास डॉक्टर पहुंचे तो उन्होंने कुछ लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।

ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे लिफ्ट का संचालन होता है। इसके बावजूद वहां कोई ऑपरेटर तैनात नहीं किया गया। जबकि इमरजेंसी से बचने के लिए कम से कम एक लिफ्ट ऑपरेटर तो वहां होना ही चाहिए था।

बताया जा रहा है कि ट्रॉमा सेंटर प्रशासन कई साल से लिफ्ट ऑपरेटर की मांग कर रहा है लेकिन केजीएमयू प्रशासन ने उन्हें एक भी आदमी नहीं दिया। अब दुर्घटना के बाद वहां ऑपरेटर तैनात करने की तैयारी चल रही है।

ओटिस कंपनी ने 10 मिनट में चालू की लिफ्ट

कुछ लोगों के लिफ्ट में फंसे होने की जानकारी मिलते ही ट्रॉमा सेंटर में हड़कंप मच गया। पीआरओ को पूरी घटना की जानकारी दी गई, लेकिन पता चला कि वहां कोई ऑपरेटर ही नहीं मिला। इस बीच ट्रॉमा सेंटर के उच्चाधिकारियों को घटना के बारे में बताया गया।

इस दौरान लिफ्ट में फंसे लोगों को बचाने की जुगत चलती रही। धीरे-धीरे समय बीतता जा रहा था कि अचानक एक रेजीडेंट डॉक्टर लिफ्ट में गर्मी और सांस न ले पाने के कारण बेहोश होकर गिर पड़ी। किसी तरह थर्ड फ्लोर के दरवाजे को फैलाकर लिफ्ट के अंदर पाइप से ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

ट्रॉमा सेंटर के स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड लिफ्ट को खोलने की कवायद में जुटे रहे। इसी दौरान दो घंटे बीत चुके थे। इसके बाद सुबह लगभग 5.45 बजे ओटिस कंपनी के कंट्रोल रूम फोन किया गया।

दुर्घटना की जानकारी मिलने के बाद आनन-फानन में वहां से दो मकैनिक ट्रॉमा सेंटर के लिए भेजे गए। लगभग आधे घंटे उन्हें वहां पहुंचने में लगा। इस दौरान लिफ्ट में मौजूद लोगों को सिलेंडर से ऑक्सीजन आपूर्ति की जाती रही।
 
ओटिस कंपनी के लोगों ने वहां पहुंचकर तुरंत लिफ्ट को चालू किया और 10 मिनट में सभी लोगों को थर्ड फ्लोर के रास्ते बाहर निकाला गया।
विज्ञापन

लिफ्ट बंद होते ही रुक गई मरीज की धड़कनें

लिफ्ट मे फंसे डॉक्टरों ने बताया कि लिफ्ट के बंद होते ही ऑक्सीजन कम होने और दहशत से मरीज की धड़कनें बंद हो गई। तुरंत उसे कार्डियो पल्मोनरी रीसैसिटेशन (सीपीआर) दिया गया।

जिसके थोड़ी ही देर बाद उसकी धड़कनें वापस आई, लेकिन बाकी लोगों की हालत बिगड़ने लगी। महिला रेजीडेंट डॉक्टर के बाद वार्ड आया और तीमारदार भी एक-एक कर समय बीतने के साथ बेहोश होते चले गए।
इस दौरान एक डॉक्टर का फोन पीआरओ को लगा, लेकिन उधर से क्विक रिस्पांस नहीं मिला।

लिफ्ट से बाहर आने तक तीनों रेजीडेंट डॉक्टर, मरीज के परिवारीजन और लेबर रूम के कर्मचारी की हालत खराब हो गई थी।

शिवकांती को आनन-फानन में ट्रॉमा वेंटीलेटर यूनिट (टीवीयू) में पहुंचाया गया। जबकि बेहोश रेजीडेंट डॉक्टर को मेडिसिन विभाग में शिफ्ट किया गया। टीवीयू में भर्ती शिवकांती की पहले ही हालत खराब हो चुकी थी।

इसलिए डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। रेजीडेंट डॉक्टर को कुछ देर बाद होश आ गया था।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें