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Lucknow News: फैमिली कोर्ट की पुरानी बिल्डिंग की नीलामी रोकने की याचिका पर हाईकोर्ट ने मंडलायुक्त व केंद्र सरकार से 18 तक मांगा जवाब

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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित फैमिली कोर्ट के पुराने मुख्य भवन को ढहाने के लिए इसकी नीलामी की कार्रवाई को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर मंडलायुक्त लखनऊ समेत केंद्र सरकार को 18 जून तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की ग्रीष्मावकाश कालीन खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता गौतम भारती की जनहित याचिका पर दिया। इसमें याची ने लखनऊ के पुराने फैमिली कोर्ट भवन को ढहाने के लिए इसकी नीलामी की प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई को कानून की मंशा के खिलाफ कहकर इसपर रोक लगाने का आग्रह किया है। कोर्ट ने मामले में याची के अधिवक्ता को नेशनल मान्यूमेंट्स प्राधिकरण को पक्षकार बनाने की अनुमति दी है।
कोर्ट ने मामले में पेश हुईं मंडलायुक्त को संबंधित कानून के तहत लाइसेंस या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का ब्योरा देते हुए अगली सुनवाई 18 जून तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही केंद्र सरकार के अधिवक्ता से भी जवाबी हलफनामा मांगा है।
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याची के अधिवक्ता का कहना था कि फैमिली कोर्ट का पुराना भवन चांदनी वाली बारादरी के नाम से जाना जाता है, जो अवध समेत लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। इसको संरक्षित करने के बजाय 12 नए कोर्ट रूम बनाने के लिए प्रशासन इसे ढहाने जा रहा है, जबकि नेशनल बिल्डिंग कोड-2016 के तहत पुराने भवन के सांस्कृतिक महत्व का आकलन किए बगैर ऐसा निर्माण नहीं किया जा सकता है। याची ने पुराने भवन को ढहाने की प्रस्तावित करवाई रद्द करते हुए बिल्डिंग को राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित करने का आग्रह किया है। सुनवाई के समय राज्य सरकार के मुख्य स्थाई अधिवक्ता समेत केंद्र व हाईकोर्ट प्रशासन के अधिवक्ता पेश हुए।
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