योगी सरकार में सहयोगी के सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) द्वारा पार्टी की स्थापना दिवस पर 27 अक्तूबर को लखनऊ में एक बड़ी रैली कर सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है।
इस मौके पर सरकार के कैबिनेट मंत्री और पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने पिछड़ों के आरक्षण के बंटवारा व शराब बंदी समेत अन्य मुद्दों पर जहां सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बनाई है, वहीं इस रैली में भाजपा के साथ अपने संबंध बनाए रखने को लेकर भी कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं।
इस संबंध में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा रैली में वह अपने समर्थकों के बीच खुलकर उन मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिन मुद्दों को लेकर उनका और भाजपा का सियासी संबंध बना है। मसलन पिछड़ों को मिल रहे 27 प्रतिशत आरक्षण में से पिछड़ी, अति पिछड़ी और सर्वाधिक पिछड़ी जाति के लिए बंटवारा करने का मुद्दा सबसे प्रमुख होगा।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने स्पष्ट तौर पर उनसे वादा किया है कि लोकसभा चुनाव के छह महीने पहले उनकी इस मांग को पूरा कर दिया जाएगा। इस दृष्टि से अक्तूबर में शाह द्वारा दी गई समय सीमा पूरी हो रही है। माना जा रहा है कि ओमप्रकाश ने अक्तूबर के अंत में इसलिए ही रैली रखा है ताकि इस मुद्दे पर वह अपना रूख स्पष्ट कर सकें।
इसके अलावा ओमप्रकाश इस रैली में उन मुद्दों को भी उठाएंगे, जिससे सियासी तौर पर संभवत: भाजपा सहमत नहीं हैं। मसलन यूपी को पूर्वांचल, पश्चिमांचल व मध्यांचल में बांटने, गुजरात व बिहार की तर्ज में यूपी में भी पूर्ण शराबबंदी लागू करने, सभी जातियों के लिए स्नातकोत्तर तक शिक्षा निशुल्क करने और अनुसूचित व अनुसूचित जनजाति के छात्रों की तरह सामान्य व पिछड़ी जाति के छात्रों के लिए निशुल्क कोचिंग की सुविधा देने जैसे मुद्दे उठाकर भी सरकार को घेरने की तैयारी है।
इधर बीच वह कभी शिवपाल से मिलकर तो कभी बसपा सुप्रीमों मायावती सरकार केफैसलों की तारीफ करके भी लगातार सरकार पर हमले बोल रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट को लेकर भी राजभर केन्द्र सरकार के फैसले को गलत करार देकर भाजपा को घेरने का संकेत दे चुके हैं। इसलिए कई मायनों में सुभासपा की इस रैली में राजभर और भाजपा के सियासी संबंधों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।