ओम बिरला ने कहा कि राष्टमंडल संसदीय संघ के सातवें अधिवेशन में विभिन्न राज्यों के 35 डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया। उद्घाटन व समापन समारोह में यूपी के विधायक व सांसदों को मिलाकर कुल 270 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
इससे पहले दिल्ली में पीठासीन अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इन मुद्दों पर फॉलोअप के लिए देहरादून में बैठक की गई।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लखनऊ अधिवेशन में दो विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। बजट प्रस्तावों पर समझ और जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना, ताकि विधायी कार्यों में विधायकों की भूमिका बढ़ाकर लोकतंत्र को मजबूत बनाया जा सके।
हमारे पास क्षमता निर्माण के लिए एक संस्था प्राइड है। तय हुआ है कि यह संस्था विधायकों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगी। इससे सदन के भीतर होने वाले वाद-विवाद का स्तर ऊंचा उठ सकेगा।
राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई गई है, जो सभी विधानसभाओं से चर्चा करके रिपोर्ट सौंपेंगे। सदन चलने में व्यवधान को रोकने के लिए नियम-पक्रिया तय करने के लिए यूपी के विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। ये नियम-प्रक्रिया नेता प्रतिपक्ष और सभी दलीय नेताओं से बातचीत करके तैयार किए जाएंगगे।
बिरला ने कहा कि संसद की रिसर्च विंग व लाइब्रेरी और राज्य विधानमंडल की लाइब्रेरी को एक तंत्र से जोड़ते हुए एक प्लेटफार्म पर लाने की योजना बनाई गई है। संसद और विधानसभा की सभी कार्यवाहियां और डिबेट एक ही प्लेटफार्म पर लाने की योजना पर काम हो रहा है।
संसद में हुई काफी डिबेट डिजिटल हो चुकी हैं, शेष डिबेट इस साल के अंत तक डिजिटल कर दी जाएंगी। राज्य विधानमंडल के अंदर भी सभी कार्यवाहियों को डिजिटल करने में मदद देंगे।
बिरला ने कहा कि संसद की पब्लिक एकाउंट कमेटी के 100 वर्ष पूरे होने पर सम्मेलन किया जाएगा। इसमें सभी राज्यों की पब्लिक एकाउंट कमेटी के चेयरमैन और सदस्यों को भी आपस में चर्चा करने के लिए बुलाया जाएगा।
उद्देश्य बजटीय प्रावधानों पर कार्यपालिका पर नियंत्रण व पारदर्शिता के लिहाज से सरकार की जवाबदेही तय करना है। इसके लिए बनाई गई समितियों को और प्रभावी बनाया जाएगा। विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, संसदीय कार्य मंत्रियों और सदन में सभी दलीय नेताओं का सम्मेलन भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सभी विधानमंडलों में सदस्यों के बेल में आकर व्यवधान उत्पन्न करने की स्थिति अक्सर देखी जाती है। इसके लिए यह भी सहमति बनी है कि संसद और राज्यों के सदन चलाने के लिए एक जैसी नियम-प्रक्रियाएं लागू की जाएं।
सभी विधानमंडल अपने श्रेष्ठ विधायकों को सम्मानित भी करेंगे। प्रस्तावित विधेयकों का उद्देश्य और मुख्य बिंदु बताने के लिए पहले ही सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। नगर निकाय और ग्राम व जिला पंचायतों में भी बजटीय व अन्य विषयों पर संवाद करके सदस्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
इतना ही नहीं कई देशों के मध्य भी जन प्रतिनिधियों और कार्मिकों को प्रशिक्षित करने पर सहमति बनी है। मालदीव के साथ यह कार्यक्रम प्रारंभ भी हो चुका है।
एक सवाल के जवाब में ओम बिरला ने कहा कि अगर कानून में किसी के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है तो उसे नहीं रोका जा सकता, भले ही वह अपराधी ही क्यों न हो। उन्होंने सदनों के माध्यम से कार्यपालिका की जवाबदेही और सरकार पर निगरानी रखने पर जोर दिया।
कहा कि सदन में बिना सूचना हिस्सा न लेने वाले सदस्यों के मामले एक समिति को संदर्भित किए जाते हैं। हिस्सा न लेने वाले सदस्यों को भत्ते नहीं मिलते हैं। उन्होंने माना कि राज्य विधानमंडल सदन ज्यादा दिन चलने चाहिए। बिजनेस देना केंद्र सरकार का काम होता है, जबकि सदन चलाने का काम सभापति का होता है।
विपक्ष को आवाज उठाने का ज्यादा अधिकार
ओम बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधि सजग प्रहरी होता है। सदन के भीतर विपक्ष को आवाज उठाने का अधिकार अधिक होता है, लेकिन ये नियम-कानून के तहत ही होना चाहिए। सदन में रखने के लिए गलत आंकड़े देने वाले अफसरों पर कार्रवाई के लिए एक समिति बनी है।