लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी रामशंकर को वक्त से पहले बूढ़ा बना दिया उनकी अपनी ही औलाद ने। सांस की बीमारी, आर्थिक तंगी से शायद वे इस कदर नहीं टूटते, जितना की उन्हें बेटे की उपेक्षा ने तोड़ दिया। नतीजा, उन्होंने खुद ही मौत को गले लगा लिया। रामशंकर की खुदकुशी की कहानी इसलिए अहम है, क्योंकि यह तमाचा है हमारी सामाजिक व्यवस्था पर।
धीरे-धीरे एकाकी परिवार की ओर बढ़ रहे लोग, किस कदर बुजुर्गों के प्रति उदासीन हो रहे हैं, यह चिंतनीय है। घटना बृहस्पतिवार रात की है। ठाकुरगंज के नेवाजगंज निवासी रामशंकर (55) ने अपने दिल की पीड़ा को कागजों पर उतारा और फांसी लगा ली। ‘मैं बड़े अफसोस के साथ लिख रहा हूं कि मेरा बेटा पैसा लेकर चला गया। मेरे पड़ोसियों ने मेरी खूब देखभाल की, इसलिए मेरा शव उन्हें ही सौंपा जाए....।’
ठाकुरगंज के नेवाजगंज निवासी रामशंकर रसोई गैस के सिलेंडर की रीफिलिंग का काम करते थे। उनकी पत्नी परमेश्वरी की मौत काफी पहले हो गई। इसके बाद आर्थिंक तंगी का दौर शुरू हुआ। कुछ दिनों तक इकलौता बेटा चेतन साथ रहा। उसने भी उम्र के इस पड़ाव और मुश्किल वक्त में साथ छोड़कर चला गया।