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शिक्षकों के लिए एक अच्छी और एक बुरी खबर

Fri, 31 Jul 2015 08:54 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला,लखनऊ
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सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में तर्द्थ रूप से काम कर रहे शिक्षकों को स्थाई करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। इस फैसले के मुताबकि सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में तदर्थ रूप से काम करने वाले वही शिक्षक स्थाई होंगे जिनकी नियुक्ति 6 अगस्त, 1993 से 30 दिसंबर, 2000 के बीच हुई है।
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इसके बाद नियुक्ति पाने वाले को स्थाई नहीं किया जाएगा। शासन स्तर पर तय अवधि के आधार पर केवल 1934 शिक्षकों को ही स्थाई होने का फायदा मिलेगा।
यह फायदा शर्तों के आधार पर मिलेगा। मसलन नियुक्ति के समय पद था या नहीं, मौजूदा समय रिक्तियों की क्या स्थिति है। डीआईओएस से लेकर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक इसका परीक्षण करेंगे।

इसके बाद स्थाई होने का फायदा दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी लेने की तैयारी में है।

प्रदेश में राजकीय इंटर कॉलेजों में भर्तियां उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग तथा सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड करता है।

शिक्षक संघों ने की थी स्थाई करने की मांग

सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में रिक्त पदों पर तदर्थ शिक्षकों की भर्ती प्रबंधन स्तर पर भी कर ली गई है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है। शिक्षक संघों ने वर्ष 2011 तक नियुक्ति तदर्थ शिक्षकों को स्थाई करने की मांग की थी।

इस संबंध में शिक्षक नेताओं व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक भी हुई थी, लेकिन शासन में 30 दिसंबर, 2000 तक तदर्थ शिक्षक के रूप में नियुक्ति पाने वालों को ही स्थाई करने पर सहमति बनी है।

इसका फायदा सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में धारा 18 के अंतर्गत 30 दिसंबर, 2000 तक 1408 तथा कठिनाई निवारण आदेश के अंतर्गत 25 जनवरी, 1999 तक नियुक्ति पाने वाले 526 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा।

तदर्थ शिक्षकों को स्थाई करने के लिए निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। मौलिक नियुक्ति के लिए शिक्षकों के नामों की सिफारिश उनकी नियुक्ति की तिथि से या वरिष्ठता के आधार पर की जाएगी।
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आयु के हिसाब से मिलेगी वरीयता

यदि दो या अधिक ऐसे शिक्षक एक ही दिनांक को नियुक्ति किए गए हैं तो आयु में अपेक्षाकृत बड़े शिक्षक की सिफारिश की जाएगी। मौलिक रूप से नियुक्त प्रत्येक शिक्षक को नियुक्ति वाले दिनांक से ही स्थाई माना जाएगा। मौलिक नियुक्ति पाने के लिए पात्र न होने वाले शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी।

तदर्थ शिक्षकों को स्थाई करने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 33 में संशोधन किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को विनियमित करने के लिए धारा 33 छ जोड़ते हुए इसका प्रावधान किया जाएगा।

यह भी देखा जाएगा कि मौलिक रूप से रिक्त पद के प्रति 6 अगस्त, 1993 को या उसके बाद, लेकिन 30 दिसंबर, 2000 के बाद पदोन्नति या सीधी भर्ती के रिक्त पद पर नियुक्ति गया हो।

नियुक्ति पाने वाले लगातार कार्य कर रहा हो और वेतन मिल रहा हो। नियुक्ति के समय अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण का पालन किया गया हो। शिक्षक पद का मामला न्यायालय में विचाराधीन नहीं होना चाहिए।
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