आजादी से पहले बनीं हवेलियों और राजमहलों को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही नई हेरिटेज पॉलिसी लाएगी।
इसका मसौदा तैयार हो चुका है, जिसे विचार के लिए शासन के वित्त विभाग में भेज दिया गया है।
नई हेरिटेज पॉलिसी के तहत विकसित करने के लिए 25-30 हवेलियों और राजमहलों को चिह्नित भी कर लिया गया है।
सिद्धार्थनगर के शिवपतिनगर में हेरिटेज होटल-रॉयल रिट्रीट के सफल प्रयोग के बाद उसी तर्ज पर पुरानी हवेलियां और राजमहलों के जीर्णोद्धार का खाका पर्यटन विभाग ने तैयार किया है।
रॉयल रिट्रीट की बिल्डिंग का निर्माण 1840 में किया गया था और तब यह अंग्रेजों की गढ़ी के नाम से जानी जाती थी।
कुछ समय पहले इसे हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया गया, जहां अब अच्छी खासी तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं।
नई हेरिटेज पॉलिसी में शिवपतिनगर के इन अनुभवों को खास तौर पर शामिल किया गया है।
ऐतिहासिक महत्व की हवेलियों और राजमहलों को ठीक-ठाक बनाने के लिए राज्य सरकार राशि देगी, यदि इन हवेलियों और राजमहलों के कानूनी वारिस इसके लिए तैयार होंगे।
बुंदेलखंड, रूहेलखंड, लखनऊ (अवध) और वाराणसी में इस तरह की काफी इमारतें पर्यटन विभाग ने चिह्नित भी कर ली हैं।
विभाग के विशेषज्ञों की राय मिलने के बाद इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।
चूंकि, सरकार की सैद्धांतिक सहमति पहले ही मिल चुकी है, इसलिए इसके पास होने में कोई दिक्कत आने की संभावना नहीं है।