पुरातत्व विभाग की लापरवाही के चलते कोठी दर्शन विलास, रोशनुद्दौला और गुलिस्तान-ए-इरम की खूबसूरती नहीं निखर सकी। इन कोठियों की मरम्मत के लिए केंद्र सरकार की ओर से 10.65 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी कोठियों का संरक्षण शुरू नहीं कराया गया,जिससे धनराशि लैप्स हो गई।
अमूमन देखा गया है कि एक ओर विभाग बजट की कमी का रोना रोते हैं,वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद का भरपूर इस्तेमाल भी नहीं करते।
अधिकारियों की लापरवाही के चलते पैसा लैप्स हो जाता है। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग को केंद्र सरकार की ओर से इन कोठियों की मरम्मत के लिए 13वें वित्त आयोग के तहत 10.65 करोड़ रुपये की संस्तुति की थी,जिसमें से कोठी दर्शन विलास पर 3.72 करोड़, रोशनुद्दौला पर 3.55 और गुलिस्तान-ए-इरम पर 3.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे,लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी इन धरोहरों की मरम्मत तक शुरू नहीं हो सकी।