गैंगरेप के आरोपी मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को ढूंढने में पुलिस अब तक नाकाम रही है। सूबे का निजाम बदलने से गायत्री की मुश्किलें तो बढ़ेंगी ही साथ ही उन अफसरों की भी दुश्वारियां बढ़ेंगी जिन्होंने गायत्री के खिलाफ केस रजिस्टर करने और उसे फरार होने में मदद की।
सूत्रों का कहना है कि सत्ता संभालते ही नई सरकार उन अधिकारियों को भी चिह्नित करेगी जिन्होंने प्रजापति की मदद की।
18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री के खिलाफ लखनऊ के गौतम पल्ली थाने में गैंगरेप का केस दर्ज किया गया था। इसके बावजूद 27 फरवरी तक वह लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र अमेठी में चुनाव का प्रचार करता रहा।
27 फरवरी को अमेठी का चुनाव खत्म हुआ तो पुलिस को गायत्री की याद आई। एक मार्च के बाद गायत्री को ढूंढने की कवायद तेज हुई, लेकिन गायत्री पुलिस के हाथ नहीं लगा।
हालांकि पुलिस ने कोशिश की कि चुनाव नतीजों से पहले गायत्री को गिरफ्तार कर ले, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा। अब देखना यह है कि नई सरकार के गठन से पहले पुलिस गायत्री को तलाश पाती है या नहीं।