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ट्रैफिक जाम का स्थायी समाधान निकालें अफसर : हाईकोर्ट

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​हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ। 
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लखनऊ। हाईकोर्ट ने शहर में ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण की समस्या पर पुलिस और नगर निगम के अफसरों को आदेश दिया है कि वे इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालें। अदालत 22 मई को इस मामले में फिर सुनवाई करेगी।
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मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश शहर में यातायात जाम, अतिक्रमण आदि की समस्याओं को लेकर दायर जनहित याचिका समेत 11 अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है। शहर में विशेष रूप से पॉलीटेक्निक से किसान पथ तक यातायात जाम की समस्या पर सुनवाई हुई।



पूर्व आदेश के तहत बीते मंगलवार को डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी, डीसीपी पूर्व डॉ. दीक्षा शर्मा और नगर निगम की जोनल अधिकारी शिल्पा, संजय यादव खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। खंडपीठ ने बताया कि एक मई के आदेश में न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने इन अफसरों को तलब किया था। ऐसे में यह उचित होगा कि मामला उसी खंडपीठ में सुनी जाए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने मामले को 22 मई को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
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अदालत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से लखनऊ में यातायात जाम बड़ी परेशानी का कारण है। कई जनहित याचिकाओं के बावजूद कोई उपयुक्त समाधान नहीं निकाला गया है। कोर्ट ने अफसरों को उपस्थित होने से पहले पूरे मार्ग का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।



एक मई को अफसरों ने ट्रैफिक जाम दूर करने के उपाय बताए थे। हालांकि, कोर्ट उन उपायों से संतुष्ट नहीं हुआ था और अधिक प्रभावी और स्थायी उपाय करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। अब 22 मई को होने वाली सुनवाई में अधिकारियों से ठोस जानकारी की अपेक्षा है।
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