तन्वी के अनुसार, यह धार्मिक पूर्वाग्रह और मोरल पुलिसिंग है। उन्हें मिश्रा के व्यवहार से अपमान महसूस हुआ है। घटना के दौरान अत्यधिक रोने की वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई, और उन्हें इनहेलर का उपयोग करना पड़ा। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एक सरकारी कार्यालय में उनका इस प्रकार उत्पीड़न हो सकता है।
एपीओ ने कहा समस्या नहीं
तन्वी के अनुसार, एपीओ ऑफिस के अधिकारियों ने उनके दस्तावेज देखकर कहा कि पासपोर्ट बनने में कोई समस्या नहीं है। बल्कि यह भी कहा कि मिश्रा के खराब व्यवहार की पहले भी कई शिकायतें आई हैं, वे इसके लिए माफी चाहते हैं। इसी दौरान उनके पति वहां (पासपोर्ट ऑफिस) पहुंचे और बताया कि उनका भी आवेदन रुका हुआ है क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम का उल्लेख किया है। उन्हें भी कहा गया है कि तन्वी के सभी दस्तावेजों में उनका मुस्लिम नाम रखा जाए।
पासपोर्ट की समस्या नहीं, नाम चुनने का हक
पीड़ित युवती के अनुसार, उनका पासपोर्ट रोका गया है, लेकिन यह उनके लिए मुद्दा नहीं है। मुद्दा नाम को लेकर उत्पीड़न है। कार्यालय में मौजूद अन्य टीसीएस कर्मचारियों के अनुसार उनके दस्तावेजों में कोई समस्या नहीं थी, फिर भी उन्हें यह सब सहना पड़ा।
आरपीओ से नहीं मिला जवाब
इस मामले में आरपीओ से बात करने का प्रयास किया गया। उनके सचिव ने शहर में न होने की बात कहते हुए संपर्क न हो पाने का तर्क दिया।