मूलरूप से जौनपुर निवासी तरुण सिन्हा ऑफिस प्रबंधक होने के साथ ही प्लॉट के नाम पर वसूले गए रुपयों और ग्राहकों की संख्या का रिकॉर्ड मेनटेन रखता था। कंपनी के एमडी के ड्राइवर बाराबंकी निवासी रामसेवक व एक अन्य आरोपी सुनील पांडेय को भी पकड़कर जेल भेजा जा चुका है।
कंपनी ने देवा रोड, गोसाईंगंज और रहमतमनगर में जीवनदीप सिटी व प्रखर सिटी के नाम से योजनाओं का झांसा देकर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के लोगों से 500 करोड़ रुपये से अधिक रुपयों की ठगी की थी। कंपनी के एमडी व अन्य अधिकारियों पर गोमतीनगर समेत कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं।
ठग आशीष ने लखनऊ में गोमतीनगर के अलावा गोरखपुर, अयोध्या, कुशीनगर, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी और गाजीपुर में भी ऑफिस खोलकर ठगी का धंधा किया।
कंपनी की ठगी के शिकार रितेश गुप्ता ने बताया कि पुलिस का दबाव बढ़ाने पर सुशील कुमार श्रीवास्तव वेश बदलकर घूम रहा था। उसने बाल छोटे करा लिए थे और फ्रेंच कट दाढ़ी रख ली थी। वह गोंडा भागने की तैयारी में था, तभी पकड़ लिया गया।
इनकी तलाश जारी
तबस्सुम, उसकी बहन तरन्नुम, तरुण सिन्हा, अंकुर श्रीवास्तव, चेतन श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, अरुण श्रीवास्तव, शिखा श्रीवास्तव, गोरखपुर निवासी मुकेश शाही, प्रीति शाही, सुनील पांडेय, प्रवीण कुमार पांडेय, दिलीप कुमार पांडेय, अखंड बाजपेयी।