भातखंडे जयंती समारोह की दूसरी शाम गायन और नृत्य के नाम रही। मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री अरुण कुमारी कोरी भले ही आयोजन में न पहुंची हो, लेकिन कलाकारों ने दमदार प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरी।
बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भातखंडे छात्रों की प्रस्तुति के अलावा मुंबई के गायक शौनक अभिषेकी ने शाम यादगार बनाई।
आकर्षण चुराने के लिये ओडिसी नृत्यांगना पद्मश्री किरण सहगल की शिष्याओं ने नृत्य से मुग्ध किया। 20 से ज्यादा छात्र और शिक्षकों ने भातखंडे कृति की प्रस्तुतियां दी।
उसके बाद मुंबई से आए शास्त्रीय गायक शौनक अभिषकी ने शुद्ध कल्याण विलंबित में ए री माई पिया..सुनाया। रुपक ताल में ला दे- ला दे सैंया चुनरिया..सुनाने के बाद उन्होंने राग परज में लाला आयो..पर तान छेड़ी।
उनके गाये भजन इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले... ने लोगों का बीता जमाना याद दिलाया।दूसरे दिन के समारोह का आकर्षण ओडिसी नृत्यांगना पद्मश्री किरण सहगल की शिष्याओं ने चुराया।
वैशाली सहगल, संगिनी कुमार, दिया डे, आयुषी ने प्रभु शिव की आराधना करते मंगलाचरण हे शिवापति पार्वती पति..के बाद बारो छोड़ों आर पल्लवी प्रस्तुति पर लोगों को मुग्ध किया।