उत्तर प्रदेश के नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों को मान्यता से पहले क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) की परीक्षा से गुजरना होगा। क्यूसीआई की मुहर लगने के बाद ही कॉलेज को संबंधित कोर्स की मान्यता दी जाएगी।
दरअसल प्रदेश में इन कॉलेजों की शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हाल ही नर्सिंग की भर्ती के दौरान योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने की वजह से करीब 1200 सीटें खाली रह गईं। विभागीय जांच में तमाम नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों में संसाधनों का अभाव मिला। वर्ष 2021-22 में मान्यता के लिए आए आवेदनों में 577 खारिज कर दिए गए। इन कॉलेजों में लैब, स्टॉफ, कक्ष सहित कई खामियां थीं। ऐसे में उत्तर प्रदेश मेडिकल फैकल्ट्री ने नर्सिंग, एएनएम, जीएनएम व अन्य पैरामेडिकल कॉलेज की क्यूसीआई से जांच कराने का प्रस्ताव तैयार किया है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर तैयार गाइडलाइन के अनुसार सुविधाएं मिलेंगी, उस पर क्यूसीआई मुहर लगाएगा।
क्यूसीआई की मुहर लगने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग संबंधित कॉलेजों को मान्यता देगा। खास बात यह है कि नए कॉलेजों के साथ ही पुराने कॉलेजों की भी क्यूसीआई से जांच कराने की तैयारी है। इतना ही नहीं सभी कॉलेजों के दस्तावेज ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों और शिक्षकों की उपस्थिति भी ऑनलाइन की जा रही है। शिक्षकों का आधार भी संबंधित कॉलेज से लिंक किया जा रहा है। ऐसे में एक शिक्षक किसी दूसरे कॉलेज में गया तो वह तत्काल पकड़ में आ जाएगा। ऐसा होने पर शिक्षक और क ॉलेज दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं सचेत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नर्सिंग व पैरामेडिकल की शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने नर्सिंग कॉलेजों में शत प्रतिशत इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं होने और न्यूनतम 75 प्रतिशत फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद कोर्स संचालन की अनुमति देने की बात कही थी।