रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले 32 वर्षीय चिनहट निवासी अजय कुमार परचून की दुकान चलाते हैं। लाइसेंस की जरूरत के बारे में पूछने पर बताया कि दुकान ठीक से नहीं चलती। रिवॉल्वर का लाइसेंस मिल जाने पर सिक्योरिटी एजेंसी में अच्छे वेतन पर नौकरी मिल जाएगी।
केस-2
मोहनलालगंज क्षेत्र के 32 वर्षीय निरंजन सोनकर ने भी रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। दस्तावेजों की जांच हुई तो बैंक खाते की छायाप्रति में मात्र डेढ़ हजार रुपये दर्ज मिले। पूछताछ में आवेदक ने कहा, लाइसेंस बनने के बाद पैसों का इंतजाम कर लेगा।
बीती अक्तूबर से शस्त्र लाइसेंस बनवाने पर लगी रोक हटने के बाद आवेदकों की संख्या बढ़ती जा रही है। आवेदन करने वाले उम्रदराज लोगों में जहां 315 व 12 बोर की बंदूक की चाह दिख रही है तो पिस्टल व रिवॉल्वर युवाओं की पसंद बनी है।
इनमें रुतबा गांठने को रिवॉल्वर और रोजी-रोटी की जरूरत के काम के लिए पिस्टल का लाइसेंस बनवाने की होड़ ज्यादा है। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे आवेदक भी शस्त्र लाइसेंस बनवाने की कतार में हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति खस्ताहाल है। रोक हटने के बाद से नौ माह में लाइसेंस आवेदकों की संख्या 15 हजार तक पहुंच गई है।