प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के मामले शासन की ओर से दिए गए जांच के निर्देश पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एनपीएस के पैसे का आहरण-वितरण अधिकारी डीआईओएस होता है और उसके पास इसकी आईडी-पासवर्ड होती है। वहीं शासन ने डीआईओएस समेत चार अधिकारियों को ही इस मामले में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से इस मामले की जांच कराने के निर्देश मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, मंडलीय उप शिक्षा निदेशक, डीआईओएस (आहरण वितरण अधिकारी) व वित्त एवं लेखाधिकारी को दी गई है। अब विभाग इस मामले में कर्मचारियों, बाबुओं की जांच करा रहा है। जबकि इसमें बड़े अधिकारी भी शक के घेरे में आ रहे हैं। इसकी बानगी प्रयागराज में देखने को मिली है, जहां संबंधित बाबू को निलंबित किया गया है।
जानकारी के अनुसार विभाग के शिक्षक-कर्मचारियों की एनपीएस में की जा रही कटौती का पैसा निर्धारित एनएसडीएल में भेजने के लिए डीआईओएस को लॉगिन-पासवर्ड दिया गया है। ऐसे में यह कहा जा रहा है कि बिना उच्च अधिकारी की सहमति के विभाग का बाबू या पटल सहायक कैसे इतनी बड़ी राशि, किसी निजी बैंक में निवेश करेगा? यही वजह है कि शिक्षकों की ओर से इस मामले में आला अधिकारियों की भी भूमिका की जांच की मांग उठाई जा रही है।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पांडेय ने कहा कि डीआईओएस की ही इसमें मुख्य भूमिका है और वही जांच के लिए नामित किए गए हैं। कई जगह तो इसमें जेडी की भी भूमिका संदिग्ध है। जब लॉगिन-पासवर्ड डीआईओएस के पास होता है तो बिना उनकी सहमति के कोई कर्मचारी इसका प्रयोग कैसे कर सकता है? इसकी भी जांच होनी चाहिए। शासन इसकी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए। प्रयागराज में इस मामले में एक बाबू को निलंबित कर मामले की इतिश्री कर ली गई है।
लखनऊ समेत कई जिलों में प्रदर्शन, मांगा हिसाब
शिक्षक-कर्मचारियों के एनपीएस की राशि निजी बीमा कंपनियों में निवेश को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है। इसे लेकर लखनऊ, बलिया, संत कबीर नगर, बस्ती, अंबेडकरनगर, अलीगढ़, आगरा आदि जिलों में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रांतीय संयोजक संजय द्विवेदी ने बताया कि एनपीएस को लेकर पूरे प्रदेश में अफरा-तफरी है। शिक्षक-कर्मचारी अपने पैसे को लेकर काफी चिंतित हैं। यही वजह है कि वे विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। विभाग को इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भी जांच कराई जानी चाहिए।
सीएम से पैसा वापस कराने, एसआईटी जांच की मांग
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर न्यू पेंशन योजना से संबंधित शिक्षकों की करोड़ों की राशि निजी बैकों में जमा कराए जाने के दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही व एसआईटी जांच कराने की मांग की है। साथ ही ऐसी धनराशि को नियमानुसार ब्याज के साथ एनएसडीएल खाते में वापस जमा कराए जाने की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी, एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी, एमएलसी नरेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि निजी बैंकों में निवेज पर पांच फीसदी तक कमीशन मिलता है। ऐसे में उच्चाधिकारियों के परिजन व रिश्तेदार निजी बैकों/ संस्थाओं के एजेंट बनकर लाखों रुपये की कमीशनखोरी कर रहे हैं। संघ के प्रादेशीय मंत्री डॉ. आरके त्रिवेदी ने एक अप्रैल 2022 के पहले और राजकीय विद्यालयों की भी जांच कराने की मांग की है। यह भी सुनिश्चित हो कि डीआईओएस एनएसडीएल के अलावा निजी बैकों या अन्य संस्था में कटौती की धनराशि को निवेश न कर सकें।
उच्च अधिकारियों ने भी नहीं दिया ध्यान
खास यह भी है कि इस मामले में उच्च अधिकारियों ने भी समय से ध्यान नहीं दिया। यह गड़बड़ी बनारस, प्रयागराज व लखनऊ जैसे जिलों में प्रकाश में आई, जहां विभाग के उच्च अधिकारी बैठते हैं और नियमित मॉनीटरिंग भी करते हैं। शुरुआत में जब एक-दो जिलों में यह मामला सामने आया तो इस पर अगर उन्होंने ध्यान दिया होता तो इस पर रोक लगाई जा सकती थी।